Bihar News: बिहार के चंपारण के रहने वाले 19 वर्षीय आदर्श कुमार की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ा सपना देखते हैं। आदर्श ने महज 14 साल की उम्र में 1,000 रुपये और एक पुराने लैपटॉप के साथ घर से निकलकर अपने लिए नई राह तलाशनी शुरू की थी।
आर्थिक चुनौतियों के बीच पले-बढ़े आदर्श ने पढ़ाई को कभी रुकने नहीं दिया। वह अपनी मां के साथ बड़े हुए और कम उम्र में ही समझ गए कि बेहतर भविष्य के लिए उन्हें खुद नए अवसर बनाने होंगे।
कोटा पहुंचे, लेकिन कोचिंग का खर्च था बड़ी चुनौती
14 साल की उम्र में आदर्श कोटा पहुंचे। हालांकि, महंगी कोचिंग फीस उनके परिवार के लिए आसान नहीं थी। ऐसे में उन्होंने पारंपरिक रास्ते के बजाय खुद सीखने, प्रोजेक्ट्स पर काम करने और नई चीजें बनाने पर ध्यान दिया।
इसी दौरान उनके मन में छात्रों की मदद करने का विचार आया। उन्होंने महसूस किया कि देश में कई ऐसे युवा हैं जिनमें प्रतिभा तो है, लेकिन सही मार्गदर्शन और अवसर नहीं मिल पाते।
Skillzo ने दिलाई अलग पहचान
इसी सोच से आदर्श ने Skillzo पहल शुरू की। इसका उद्देश्य छात्रों को स्किल डेवलपमेंट, मेंटरशिप और बेहतर अवसरों से जोड़ना था। धीरे-धीरे उनकी यह पहल करीब 20 हजार छात्रों तक पहुंच गई।
आदर्श के इसी सामाजिक काम ने उनकी प्रोफाइल को मजबूत बनाया और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने लगी।
11 हजार नामांकन के बीच जीता Global Student Prize
आदर्श की उपलब्धियों को 2025 में बड़ी अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली, जब उन्होंने Global Student Prize अपने नाम किया। इस पुरस्कार के लिए 148 देशों से करीब 11 हजार नामांकन आए थे।
इतने बड़े स्तर पर चुना जाना उनके लिए खास उपलब्धि थी। इससे उनकी कहानी बिहार से निकलकर वैश्विक मंच तक पहुंच गई।
22 यूनिवर्सिटी से रिजेक्शन, फिर मिला बड़ा मौका
विदेश में पढ़ाई का सपना भी आदर्श के लिए आसान नहीं था। उन्हें करीब 22 यूनिवर्सिटीज से रिजेक्शन मिला। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। बाद में Second Chance के जरिए उनकी प्रोफाइल Georgetown University in Qatar तक पहुंची।
यूनिवर्सिटी ने उनके अकादमिक रिकॉर्ड के साथ सामाजिक काम और उपलब्धियों को भी महत्व दिया। इसके बाद उन्हें दाखिला और करीब 3.5 करोड़ रुपये की फुल-राइड स्कॉलरशिप मिली।
मां के साथ शेयर किया जिंदगी बदलने वाला पल
Georgetown से स्कॉलरशिप का ईमेल जब आया, उस समय आदर्श अपनी मां के साथ बैठे थे। यह पल उनके लिए बेहद भावुक था, क्योंकि इस पूरे सफर में उनकी मां उनके साथ रहीं।
आदर्श अब Political Science, Economics और International Relations की पढ़ाई करना चाहते हैं। उनकी स्कॉलरशिप में पढ़ाई के साथ रहने, खाने, फ्लाइट, वीजा और हेल्थ इंश्योरेंस जैसे खर्च भी शामिल हैं।
आदर्श की कहानी बताती है कि संसाधनों की कमी मंजिल की राह रोक सकती है, लेकिन अगर मेहनत, सीखने की इच्छा और हौसला मजबूत हो तो बड़ी से बड़ी चुनौती को पार किया जा सकता है।
