New Delhi News: राजधानी दिल्ली में रोजाना ऑटो और टैक्सी से सफर करने वाले लोगों की जेब पर जल्द ही अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। सीएनजी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बाद ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने दिल्ली सरकार से किराया बढ़ाने की मांग की है। अगर सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, तो रोज ऑफिस आने-जाने का खर्च पहले से काफी ज्यादा हो सकता है।
क्यों बढ़ रही है किराया बढ़ाने की मांग?
दिल्ली ऑटो रिक्शा संघ और दिल्ली प्रदेश टैक्सी यूनियन ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर कहा है कि बीते कुछ महीनों में सीएनजी के दाम तेजी से बढ़े हैं। हाल ही में सीएनजी की कीमत 77.9 रुपये से बढ़ाकर 79.9 रुपये प्रति किलो कर दी गई है। इससे पहले अप्रैल और मई 2025 में भी कीमतों में इजाफा हुआ था।यूनियनों का कहना है कि सिर्फ ईंधन ही नहीं, बल्कि टायर, इंजन ऑयल, स्पेयर पार्ट्स और वाहन मेंटेनेंस का खर्च भी लगातार बढ़ रहा है। इसके अलावा फरवरी 2026 से ऑटो और टैक्सी की फिटनेस फीस भी बढ़ाकर 800 रुपये कर दी गई है। ऐसे में ड्राइवरों के लिए पुरानी दरों पर काम करना मुश्किल होता जा रहा है।
ऑटो का किराया कितना बढ़ सकता है?
ऑटो यूनियन ने सरकार से मांग की है कि न्यूनतम किराया 30 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये किया जाए। वहीं प्रति किलोमीटर किराया 11 रुपये से बढ़ाकर 15 रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है।अगर यह मांग मान ली जाती है, तो रोजाना करीब 20 किलोमीटर सफर करने वाले यात्रियों को हर महीने लगभग 100 से 110 रुपये ज्यादा खर्च करने पड़ सकते हैं। खासतौर पर नौकरीपेशा लोगों के लिए यह बढ़ोतरी मासिक बजट पर असर डाल सकती है।
टैक्सी से सफर करना भी पड़ेगा भारी
सिर्फ ऑटो ही नहीं, टैक्सी का सफर भी महंगा हो सकता है। यूनियन ने नॉन-एसी टैक्सी का किराया 17 रुपये प्रति किलोमीटर से बढ़ाकर 30 रुपये करने की मांग की है। वहीं एसी टैक्सी के लिए किराया 25 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये प्रति किलोमीटर करने का प्रस्ताव है।इसके अलावा टैक्सी का न्यूनतम किराया 40 रुपये से बढ़ाकर 70 रुपये करने की भी मांग की गई है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो रोज टैक्सी से ऑफिस जाने वालों का मासिक खर्च करीब 250 से 290 रुपये तक बढ़ सकता है।
आम लोगों की बढ़ी चिंता
दिल्ली में लाखों लोग रोजाना ऑटो और टैक्सी का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में किराया बढ़ने की खबर से आम यात्रियों की चिंता बढ़ गई है। अब सभी की नजर दिल्ली सरकार के फैसले पर टिकी हुई है कि वह यूनियनों की मांग मानती है या नहीं
