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‘ढक्कन खोल के’ बोलते ही छा जाते थे CS Dubey, फिल्मों में बनते थे कपटी लाला और भ्रष्ट मुनीम

Bollywood News: हिंदी सिनेमा के पुराने दौर में ऐसे कई कलाकार रहे हैं, जिन्होंने लीड रोल न मिलने के बावजूद अपने अभिनय से दर्शकों के दिल में खास जगह बनाई। इन्हीं कलाकारों में एक नाम सीएस दुबे का भी रहा है। उन्होंने फिल्मों में कभी भ्रष्ट मुनीम, कभी कपटी लाला तो कभी सेठ जैसे किरदार निभाए और अपनी दमदार अदाकारी से हर भूमिका को यादगार बना दिया।

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सीएस दुबे की खासियत यह थी कि पर्दे पर उनका किरदार भले ही कुछ मिनटों के लिए दिखाई देता था, लेकिन उनकी एक्टिंग का असर लंबे समय तक रहता था। उनके कई नेगेटिव किरदारों को देखकर दर्शक उनसे नाराज हो जाते थे और उन्हें खूब गालियां तक देते थे। यही उनकी अभिनय क्षमता की सबसे बड़ी खासियत थी।

महज 17 साल की उम्र में मुंबई पहुंच गए थे

सीएस दुबे का जन्म मध्य प्रदेश में हुआ था। अभिनय की दुनिया में कदम रखने का जुनून उन्हें महज 17 साल की उम्र में मुंबई ले आया। 50 के दशक में उन्होंने फिल्मों में काम करना शुरू किया। हालांकि शुरुआती दौर में उन्हें छोटी भूमिकाएं ही मिलीं, लेकिन उन्होंने हर रोल को पूरी मेहनत से निभाया।

समय के साथ उनकी पहचान एक बेहतरीन चरित्र अभिनेता के रूप में बनने लगी। उन्होंने करीब 150 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर अपनी अलग पहचान बनाई।

एक डायलॉग ने बदल दी किस्मत

साल 1975 में आई फिल्म ‘जिंदा दिल’ सीएस दुबे के करियर के लिए खास साबित हुई। इस फिल्म में उनका एक डायलॉग ‘ढक्कन खोल के’ खूब लोकप्रिय हुआ। यह लाइन इतनी मशहूर हुई कि लोगों की जुबान पर चढ़ गई।

बाद में सीएस दुबे ने अपने रेडियो कार्यक्रम में भी इस तकियाकलाम का इस्तेमाल किया। यही डायलॉग धीरे-धीरे उनकी पहचान बन गया और दर्शक उन्हें इस अंदाज से भी याद करने लगे।

फिल्मों में खलनायक, असल जिंदगी में समाजसेवी

सीएस दुबे ने ‘राखी और हथकड़ी’, ‘पतिता’, ‘मिस्टर एंड मिसेस 55’, ‘भाभी’, ‘गबन’ और ‘तीसरी कसम’ जैसी फिल्मों में काम किया। उनके ग्रे और नेगेटिव किरदार इतने प्रभावी होते थे कि दर्शक उन्हें सच में बुरा इंसान समझ बैठते थे।

हालांकि पर्दे के बाहर उनकी छवि इससे बिल्कुल अलग थी। बताया जाता है कि वह समाजसेवा से जुड़े हुए थे और अपनी कमाई का एक हिस्सा गरीब बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करते थे। वह भारत छोड़ो आंदोलन में भी शामिल हुए थे और इसके चलते उन्हें कम उम्र में जेल जाना पड़ा था।

यही वजह है कि सीएस दुबे को सिर्फ एक कलाकार के तौर पर नहीं, बल्कि अपने दौर के उन शानदार चरित्र अभिनेताओं में याद किया जाता है, जिन्होंने छोटे पर्दे के समय में भी बड़े प्रभाव वाली पहचान बनाई।

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