Flash Flood: नेपाल की त्रिशूली नदी घाटी में पिछले सप्ताह आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। अब इस आपदा के बाद इलाके में तीन नई झीलें बनने की जानकारी सामने आई है।पहाड़ों से बड़ी मात्रा में मलबा नीचे आने के कारण पानी का बहाव रुक गया और इसके पीछे पानी जमा होकर झीलों का रूप ले चुका है। इन झीलों के टूटने की स्थिति में निचले इलाकों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
अचानक झीलें फटीं तो आ सकती है दूसरी बड़ी बाढ़
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन झीलों से पानी को नियंत्रित तरीके से बाहर नहीं निकाला गया, तो अचानक पानी का दबाव बढ़ने पर झीलें टूट सकती हैं।ऐसी स्थिति में बड़ी मात्रा में पानी और मलबा एक साथ नीचे की ओर बह सकता है। इससे पहले से प्रभावित इलाकों में एक और विनाशकारी बाढ़ आने का खतरा पैदा हो सकता है।
विशेषज्ञों ने इसे संभावित कैस्केडिंग इम्पैक्ट बताया है, जिसमें एक झील के टूटने से आगे बनी दूसरी झील भी प्रभावित हो सकती है।
300 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचा था पानी और मलबे का बहाव
नेपाल हिमालयन ग्लेशियर और माउंटेन रिसर्चर धनंजय रेग्मी ने बताया कि पिछले बुधवार आई फ्लैश फ्लड में पानी और मलबे का बहाव शुरुआती अनुमान से कहीं ज्यादा तेज था।उनके मुताबिक, बहाव की रफ्तार करीब 300 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। इतनी तेज गति से पानी और मलबा संकरी घाटियों से नीचे आया, जिससे रास्ते में मौजूद बस्तियों और ढांचों को भारी नुकसान हुआ।
नियंत्रित तरीके से पानी निकालना सबसे बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों के मुताबिक, खतरे को कम करने के लिए झीलों में जमा पानी को नियंत्रित तरीके से बाहर निकालना जरूरी हो सकता है।पहाड़ी और बेहद कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इस तरह की कार्रवाई चुनौतीपूर्ण है। जब तक पानी का दबाव कम नहीं किया जाता, निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा बना रह सकता है।
प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की गई है।
राहत और बचाव के साथ नए खतरे पर भी नजर
नेपाल में राहत और बचाव अभियान के बीच प्रशासन और विशेषज्ञों के सामने अब एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ प्रभावित इलाकों में लापता लोगों की तलाश और राहत कार्य जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ नई बनी झीलों से संभावित बाढ़ के खतरे पर नजर रखी जा रही है।
