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April Fool’s Day: क्या 1 April के दिन का इतिहास ?क्यों आज के दिन लोग बनाते हैं एक-दूसरे को बेवकूफ

April Fool’s Day: आज 1 अप्रैल है, यानी वह दिन जब दुनिया भर में लोग एक-दूसरे के साथ मजाक करते हैं और उन्हें ‘मूर्ख’ बनाने की कोशिश करते हैं। हालांकि यह परंपरा सदियों पुरानी है, लेकिन इसकी सटीक उत्पत्ति आज भी एक रहस्य बनी हुई है। इतिहास के अलग-अलग दौर में इस दिन को लेकर कई कहानियां सामने आई हैं। कहीं इसे कैलेंडर में बदलाव से जोड़ा गया है, तो कहीं प्राचीन त्योहारों और मौसम के बदलते मिजाज से। आइए जानते हैं अप्रैल फूल डे की शुरुआत से जुड़ी प्रमुख मान्यताओं और इसके दिलचस्प किस्सों के बारे में।

प्राचीन रोम का ‘हिलारिया’ त्योहार

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अप्रैल फूल डे का एक सिरा प्राचीन रोम के ‘हिलारिया’ त्योहार से भी जुड़ता है। यह त्योहार मार्च के अंत में मनाया जाता था, जिसमें लोग वेश बदलकर एक-दूसरे का मजाक उड़ाते थे। दिलचस्प बात यह है कि इस दिन आम जनता को शासकों तक का मजाक उड़ाने की आजादी थी। माना जाता है कि यह परंपरा मिस्र की पौराणिक कथाओं से प्रेरित थी, जिसका मुख्य उद्देश्य समाज में हंसी-खुशी और हास्य फैलाना था।

वसंत ऋतु और प्रकृति का ‘मजाक’

कुछ लोक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन का संबंध वसंत ऋतु की शुरुआत से भी है। मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत में मौसम अचानक करवट लेता है। कभी तेज धूप तो कभी अचानक बारिश जैसी अप्रत्याशित परिस्थितियां पैदा होती हैं, जिससे लोगों को प्रकृति द्वारा ‘मूर्ख’ बनाए जाने जैसा अनुभव होता है। इसी अनिश्चितता को इंसानी स्वभाव में मजाक और शरारतों के रूप में शामिल कर लिया गया।

ब्रिटेन और स्कॉटलैंड में ‘गॉक हंटिंग’ का ट्रेंड

18वीं शताब्दी तक यह परंपरा ब्रिटेन में काफी लोकप्रिय हो चुकी थी। स्कॉटलैंड में तो इसे दो दिनों तक मनाया जाता था। पहले दिन ‘गॉक हंटिंग’ होती थी, जिसमें लोगों को फर्जी कामों के लिए लंबी दूरी पर भेजा जाता था। ‘गॉक’ शब्द वहां कोयल पक्षी के लिए इस्तेमाल होता है, जिसे मूर्खता का प्रतीक माना जाता है। दूसरे दिन टैली डे’ मनाया जाता था, जिसमें लोगों की पीठ पर मजाकिया संदेश चिपकाकर शरारतें की जाती थीं।
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