Ram Van Gaman Marg:अयोध्या से चित्रकूट तक बन रहे राम वन गमन मार्ग में गड़बड़ी और बरसात के दौरान सड़क क्षतिग्रस्त होने के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाराजगी के बाद शासन ने सख्त कार्रवाई की है।
शनिवार को प्रयागराज में तैनात अधिशासी अभियंता रवींद्र पाल सिंह को निलंबित कर दिया गया। वहीं अधीक्षण अभियंता ओंकार भारतीय के खिलाफ नियम-7 के तहत विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। निर्माण संस्था के खिलाफ भी कार्रवाई के लिए नोटिस जारी किया गया है।
जांच में मिलीं कई खामियां
ग्रीनफील्ड राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 731ए राम वन गमन मार्ग के पैकेज-2 के निरीक्षण में सड़क पर कई खामियां मिली थीं। कई जगह सड़क में दरारें दिखाई दीं और ढलान भी क्षतिग्रस्त मिले।
किमी 35 से 49.15 के बीच करीब 1.5 किलोमीटर हिस्से में पेवमेंट और किनारे की पटरी में दरारें मिलीं। इसके अलावा करीब 500 मीटर लंबाई में हाईवे किनारे किए गए सुरक्षात्मक कार्य भी क्षतिग्रस्त पाए गए। जांच टीम ने इन कमियों की पुष्टि की।
एक्सईएन पर गिरी गाज
शासन ने परियोजना के पर्यवेक्षणीय दायित्वों का सही तरीके से निर्वहन नहीं करने के लिए अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंता को जिम्मेदार माना।
विशेष सचिव दिव्य प्रकाश गिरि की ओर से शनिवार को जारी आदेश में एक्सईएन रवींद्र पाल सिंह को निलंबित किया गया। निलंबन के दौरान उन्हें प्रमुख अभियंता विकास एवं विभागाध्यक्ष लोक निर्माण विभाग के कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
एसई पर विभागीय जांच
अधीक्षण अभियंता ओंकार भारतीय को भी परियोजना की निगरानी में लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। शासन ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
इस मामले की जांच के लिए मुख्य अभियंता वाराणसी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। साथ ही निर्माण संस्था को भी नोटिस जारी कर उसके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।
पवन वर्मा की मुश्किलें बढ़ीं
एक अन्य मामले में प्रतिनियुक्ति पर यूपीडा में तैनात रहे लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता पवन वर्मा पर भी विभागीय कार्रवाई शुरू हुई है।
एक दिन पहले उनकी प्रतिनियुक्ति रद्द कर उन्हें प्रमुख अभियंता विभागाध्यक्ष कार्यालय से संबद्ध किया गया था। अब शनिवार को शासन ने उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए हैं।
पुराने मामले में कार्रवाई
पवन वर्मा इससे पहले भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण में मुख्य अभियंता यातायात के पद पर तैनात थे। उनके प्रतिनियुक्ति कार्यकाल के दौरान बेयर बोट चार्टरिंग अनुबंध के क्रियान्वयन में वित्तीय अनियमितता सामने आई थी।
संबंधित फर्म की ओर से विभाग को दिया गया पोस्ट डेटेड चेक भी बाउंस हो गया था। आरोप है कि चेक बाउंस होने के बावजूद समय पर जरूरी कार्रवाई नहीं की गई। शासन ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए उत्तर प्रदेश सरकारी नियमावली के नियम-7 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की है। अब पवन वर्मा को आरोप पत्र दिया जाएगा और उनसे जवाब मांगा जाएगा
