Lucknow School Fee Rules D M Strict, लखनऊ में नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों के खिलाफ कई शिकायतें सामने आई हैं। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल मनमाने तरीके से फीस बढ़ा रहे हैं और बच्चों को खास दुकानों से ही यूनिफॉर्म और किताबें खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी विशाख जी ने सख्त कदम उठाए हैं।
अधिकारियों के साथ बैठक
शुक्रवार को डीएम ने जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने साफ कहा कि किसी भी तरह की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी शिकायतों की तुरंत जांच कराने के निर्देश दिए।
जांच के लिए बनी टीम
डीएम ने आदेश दिया कि शिकायतों की जांच के लिए अपर जिलाधिकारी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में संयुक्त टीम बनाई जाए। यह टीम स्कूलों का निरीक्षण करेगी और रिपोर्ट तैयार करेगी। क्षेत्रीय उप जिलाधिकारी, अपर नगर मजिस्ट्रेट और स्कूलों के प्रधानाचार्य भी इस टीम का हिस्सा होंगे।
यूनिफॉर्म बदलने पर रोक
बैठक में सबसे बड़ा फैसला यूनिफॉर्म को लेकर लिया गया। डीएम ने कहा कि स्कूल हर साल या एक-दो साल में यूनिफॉर्म नहीं बदल सकते। अब कम से कम पांच शैक्षणिक सत्र तक एक ही यूनिफॉर्म लागू रहेगी। इससे अभिभावकों पर पड़ने वाला अतिरिक्त खर्च कम होगा।
फीस बढ़ाने पर भी नियम तय
डीएम ने फीस बढ़ाने के नियम भी स्पष्ट कर दिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा छात्रों के लिए फीस में बढ़ोतरी सीमित होगी। यह बढ़ोतरी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और पांच प्रतिशत शुल्क के दायरे में ही की जा सकेगी।
पारदर्शिता जरूरी
हर स्कूल को अपनी वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर फीस का पूरा विवरण देना होगा। साथ ही हर भुगतान की रसीद देना अनिवार्य होगा। इससे अभिभावकों को सही जानकारी मिल सकेगी और पारदर्शिता बनी रहेगी।
खास दुकानों से खरीदने का दबाव नहीं
डीएम ने साफ कहा कि किसी भी छात्र को किसी खास दुकान से किताब, यूनिफॉर्म या स्टेशनरी खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। अगर कोई स्कूल ऐसा करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
उल्लंघन पर कड़ी सजा
अगर जांच में शिकायत सही पाई जाती है, तो संबंधित स्कूल पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर स्कूल की मान्यता भी रद्द की जा सकती है।
शिकायत के लिए नोडल अधिकारी
डीएम ने अपर जिलाधिकारी आपूर्ति ज्योति गौतम और जिला विद्यालय निरीक्षक को नोडल अधिकारी बनाया है। अभिभावक और छात्र उनसे सीधे संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
