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Bhanu Saptami 2026: सूर्य देव को इस विधि से दें अर्घ्य, बढ़ेगा मान-सम्मान और दूर होंगी जीवन की बाधाएं

Bhanu Saptami: हिंदू धर्म में भानु सप्तमी को भगवान सूर्य नारायण की उपासना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। यह तिथि सूर्य देव को समर्पित होती है और मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और अर्घ्य अर्पित करने पर व्यक्ति को सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और यश की प्राप्ति होती है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा, ऊर्जा, नेतृत्व क्षमता और सम्मान का कारक ग्रह माना गया है। ऐसे में भानु सप्तमी का दिन सूर्य कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है।

कुंडली में सूर्य कमजोर होने पर क्या होता है?

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ज्योतिष के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य कमजोर स्थिति में हो, तो उसे करियर, व्यवसाय और सामाजिक जीवन में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे लोगों को अक्सर अपनी मेहनत का उचित फल नहीं मिलता, कार्यस्थल पर पहचान पाने में कठिनाई होती है और आत्मविश्वास में भी कमी देखी जा सकती है।

वहीं मजबूत सूर्य व्यक्ति को नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की शक्ति, सरकारी क्षेत्र में सफलता और समाज में प्रतिष्ठा दिलाने में मदद करता है। इसलिए सूर्य को मजबूत करने के लिए नियमित रूप से अर्घ्य देने की सलाह दी जाती है।

सूर्य देव को अर्घ्य देने की सही विधि

भानु सप्तमी के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरें। जल में लाल चंदन, कुमकुम, अक्षत और लाल रंग के फूल डालें। यदि आप व्यापार में उन्नति की कामना करते हैं तो जल में थोड़ी सी मिश्री भी मिला सकते हैं।

अब पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य देव के सामने खड़े हों। दोनों हाथों से तांबे का लोटा पकड़कर धीरे-धीरे सूर्य को जल अर्पित करें। ध्यान रखें कि अर्घ्य देते समय आपकी दृष्टि सीधे सूर्य पर न होकर जल की धारा से छनकर आने वाली सूर्य किरणों पर हो।

इन मंत्रों का करें जाप

अर्घ्य अर्पित करते समय “ॐ सूर्याय नमः” या “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का कम से कम 11 बार जाप करना शुभ माना जाता है। मंत्रोच्चारण के साथ अर्घ्य देने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

पूजा के बाद करें यह कार्य

अर्घ्य पूरा होने के बाद उसी स्थान पर सूर्य देव की तीन बार दक्षिणावर्त (क्लॉकवाइज) परिक्रमा करें। इसके बाद अर्पित जल को माथे और आंखों पर लगाएं। अंत में श्रद्धा और भक्ति भाव से सूर्य देव की आरती करें।

Disclaimer- यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. The Mid Post इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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