Weather Update: यूरोपीय मौसम एजेंसी ECMWF के ताज़ा अपडेट के अनुसार प्रशांत महासागर में लगातार बदलती परिस्थितियाँ वैश्विक मौसम प्रणाली को प्रभावित कर सकती हैं। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि समुद्री सतह का तापमान सामान्य से बढ़ रहा है, जिससे अल नीनो जैसी स्थिति बनने की आशंका मजबूत हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले महीनों में दुनिया भर के मौसम पैटर्न को प्रभावित कर सकता है।
अल नीनो की ओर बढ़ते संकेत
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार नीनो 3.4 क्षेत्र में तापमान में वृद्धि देखी जा रही है, जो अल नीनो के शुरुआती संकेतों में से एक माना जाता है। सामान्यतः जब यह तापमान 0.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाता है और लगातार कई महीनों तक बना रहता है, तभी अल नीनो की आधिकारिक घोषणा की जाती है।
अनुभवी मौसम विज्ञानी और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव एम. राजीवन के अनुसार ECMWF के नवीनतम चार्ट बताते हैं कि यह सीमा पार हो चुकी है, हालांकि इसकी पुष्टि के लिए निरंतर निगरानी जरूरी है।
वैश्विक एजेंसियों की चेतावनी
पिछले महीने कई अंतरराष्ट्रीय मौसम एजेंसियों ने संकेत दिए थे कि अल नीनो विकसित होने की स्थिति में है। अमेरिकी मौसम संस्थानों ने भी मई से जुलाई के बीच इसके बनने की संभावना को लगभग 82 प्रतिशत तक बताया था। वहीं ऑस्ट्रेलियाई मौसम ब्यूरो के आंकड़ों में भी नीनो 3.4 क्षेत्र का तापमान सामान्य से 0.67 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है, जो इस पैटर्न के और मजबूत होने का संकेत देता है।
भारत में मानसून की स्थिति
इसी बीच भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने भी दस्तक दे दी है। यह इस बार अपने सामान्य समय से तीन दिन की देरी से केरल पहुंचा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के प्रमुख मृत्युंजय महापात्र के अनुसार मानसून अब धीरे-धीरे पश्चिमी तट, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ रहा है और आने वाले दो से तीन दिनों में तमिलनाडु के कुछ हिस्सों को भी कवर कर सकता है।
हालांकि IMD ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इन क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना बहुत अधिक नहीं है। विभाग का अनुमान है कि इस साल मानसून औसत से कम रह सकता है और कुल वर्षा लगभग 90% लॉन्ग पीरियड एवरेज के आसपास रहने की संभावना है।
विशेषज्ञों की राय और आगे की स्थिति
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो की स्थिति अगर मजबूत होती है तो इसका सीधा असर मानसून की तीव्रता और वितरण पर पड़ सकता है। कुछ क्षेत्रों में बारिश कम हो सकती है, जबकि कुछ जगहों पर अनियमित और तीव्र वर्षा देखने को मिल सकती है।
फिलहाल सभी प्रमुख मौसम एजेंसियाँ—ECMWF, अमेरिकी संस्थान और IMD—अपने अगले अपडेट पर काम कर रही हैं। आने वाले एक सप्ताह में नए पूर्वानुमान से स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी कि अल नीनो कितनी तेजी से विकसित हो रहा है और इसका भारत सहित वैश्विक मौसम पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
