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छोटी सी लापरवाही से होता है बड़ा नुकसान,जानिए सही नियम वरना होगा नुकसान

जीवन में कई बार ऐसा दौर आता है जब मेहनत के बावजूद सफलता हाथ नहीं लगती। काम बनते-बनते बिगड़ जाते हैं, मानसिक तनाव बढ़ने लगता है और आर्थिक परेशानियां भी पीछा नहीं छोड़तीं। ज्योतिष शास्त्र में ऐसी परिस्थितियों को कई बार शनि के प्रभाव से जोड़कर देखा जाता है।

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मान्यता है कि जब शनिदेव की दशा या साढ़ेसाती चल रही हो, तो व्यक्ति के जीवन में उतार-चढ़ाव और चुनौतियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में ज्योतिष में लोहे का छल्ला धारण करने का उपाय बताया गया है, जिसे शनि दोष को कम करने और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाला माना जाता है।

किस उंगली में पहनें लोहे का छल्ला?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार लोहे का छल्ला हमेशा दाएं हाथ की मध्यमा उंगली में पहनना शुभ माना जाता है। मध्यमा उंगली का संबंध शनि ग्रह से माना जाता है, इसलिए इसी उंगली में इसे धारण करने से इसका प्रभाव बेहतर माना जाता है।

यदि किसी कारणवश दाएं हाथ में पहनना संभव न हो, तो बाएं हाथ की मध्यमा उंगली में भी इसे पहना जा सकता है।

कब पहनना चाहिए?

लोहे का छल्ला धारण करने के लिए शनिवार का दिन सबसे शुभ माना गया है। इसके अलावा अमावस्या का दिन भी इसके लिए अनुकूल माना जाता है।

विशेष रूप से प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के आसपास का समय इसे पहनने के लिए उपयुक्त माना जाता है।

लोहे का छल्ला पहनने की सही विधि

लोहे का छल्ला खरीदकर सीधे पहनना उचित नहीं माना जाता। इसे धारण करने से पहले विधि-विधान से शुद्ध करना जरूरी होता है।

  • शनिवार शाम छल्ले को सरसों के तेल में कुछ देर रखें।
  • इसके बाद शनि मंत्र ॐ शं शनैश्चराय नमः’ का 108 बार जाप करें।
  • जाप के बाद छल्ले को गंगाजल से शुद्ध करें।
  • शनिदेव के सामने रखकर शनि चालीसा का पाठ करें और आरती करें।
  • प्रार्थना के बाद इसे मध्यमा उंगली में धारण करें।

किन लोगों को पहनना चाहिए?

जिन लोगों की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या शनि दोष हो, उनके लिए यह उपाय लाभकारी माना जाता है। हालांकि, इसे धारण करने से पहले किसी अनुभवी ज्योतिषी से सलाह लेना जरूरी है।

क्या बताए जाते हैं इसके लाभ?

मान्यता है कि लोहे का छल्ला पहनने से शनि के अशुभ प्रभाव कम हो सकते हैं। इससे करियर और व्यापार में आने वाली बाधाएं कम होती हैं, मानसिक तनाव घटता है और आर्थिक स्थिति में सुधार आने की संभावना बढ़ती है।

अस्वीकरण: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय विश्वासों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है।

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