केंद्रीय बजट 2026-27 में कस्टम ड्यूटी स्लैब्स को सरल बनाने की योजना है, जो विदेशी सामान को कुछ हद तक सस्ता कर सकती है। वर्तमान में 8 मुख्य स्लैब्स (0% से 150% तक) को घटाकर 5-6 करने का प्रस्ताव है, जिससे विवाद कम होंगे और आयात आसान होगा। हालांकि, कुछ उत्पादों पर ड्यूटी बढ़ाने से चुनिंदा आयात महंगे हो सकते हैं।
स्लैब्स कम करने का मतलब
सरकार CBIC के नेतृत्व में टैरिफ संरचना को सरल बना रही है। बजट 2025 में 7 स्लैब हटाकर 8 किए गए थे; अब आगे रेशनलाइजेशन। उद्देश्य: GST से तालमेल, विवाद घटाना (75,000+ केस लंबित)। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी जैसे सामान के आयात पर लागत कम हो सकती है।
चुनिंदा वृद्धि की संभावना
ट्रेड डेफिसिट ($223 बिलियन) कम करने को इंजीनियरिंग गुड्स, स्टील, सूटकेस जैसे 100 उत्पादों पर ड्यूटी बढ़ाई जा सकती है (वर्तमान 7.5-10%)। चीन पर निर्भरता घटाने का लक्ष्य। FTA के साथ कम दरें।
अन्य उम्मीदें
कस्टम्स एमनेस्टी स्कीम: पुराने विवाद सुलझाने को ब्याज-दंड माफी। SEZ-DTA रिफॉर्म्स, ड्यूटी इनवर्शन सुधार। पोर्ट एफिशिएंसी बढ़ेगी।
प्रभाव उपभोक्ताओं पर
सरलीकरण से आयात सस्ता, लेकिन वृद्धि वाले सामान महंगे। मैन्युफैक्चरिंग बूस्ट से लंबे समय में फायदा। FM निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को ऐलान करेंगी।
