पाकिस्तान के भीतर से पहली बार इस तरह खुलकर भारत के समर्थन में आवाज़ उठी है, जिसने दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में नया संदेश दिया है। यह आवाज़ बलूचिस्तान के प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच की है, जिन्होंने न सिर्फ पाकिस्तान की नीतियों की आलोचना की, बल्कि भारत के साथ खुले और औपचारिक रिश्तों का आह्वान भी किया है।
भारत के लिए मीर यार बलूच का संदेश
मीर यार बलूच, जो लंबे समय से पाकिस्तान के कब्जे और बलूचों पर हो रहे मानवाधिकार उत्पीड़न के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं, ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के नाम खुले पत्र में भारत के लिए स्पष्ट समर्थन जताया। उन्होंने 2025 में भारतीय सरकार द्वारा चलाए गए “ऑपरेशन सिंदूर” की तारीफ की, जिसे पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी ढांचों के खिलाफ “साहसिक और निर्णायक कार्रवाई” बताया गया। इस पत्र में उन्होंने भारत और बलूचिस्तान के बीच शांति, सुरक्षा, ऊर्जा, व्यापार और साझा रणनीतिक हितों पर गहरे सहयोग की बात कही।
‘2026 बलूचिस्तान ग्लोबल डिप्लोमैटिक वीक’ क्या है?
मीर यार बलूच ने घोषणा की कि तथाकथित “रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान” 2026 के पहले सप्ताह को “2026 बलूचिस्तान ग्लोबल डिप्लोमैटिक वीक” के रूप में मनाएगा। इसका उद्देश्य दुनिया भर के देशों की सरकारों, विदेश मंत्रालयों, सांसदों, थिंक टैंकों और मानवाधिकार संगठनों के साथ सीधे और संगठित कूटनीतिक जुड़ाव बढ़ाना है। इस सप्ताह के दौरान बलूच प्रतिनिधि अपने स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता, मानवाधिकार हनन, जबरन गायब किए जाने और सैन्य अभियानों जैसे मुद्दों को वैश्विक मंच पर उठाने की योजना बना रहे हैं।
https://x.com/miryar_baloch/status/2006759716190564661
पाकिस्तान, चीन और क्षेत्रीय सुरक्षा का सवाल
अपने संदेश में मीर यार बलूच ने खास तौर पर पाकिस्तान–चीन गठजोड़ पर चिंता जताई और चेतावनी दी कि चीन आने वाले महीनों में बलूचिस्तान में सैन्य तैनाती कर सकता है, जो भारत और बलूचिस्तान दोनों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा होगा। उन्होंने कहा कि चीन–पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) अंतिम चरण में पहुंच चुका है और बिना स्थानीय जनता की सहमति के “चीनी बूट्स ऑन द ग्राउंड” क्षेत्रीय स्थिरता को हिला सकते हैं। यही कारण है कि उन्होंने भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि बलूच आंदोलन को नज़रअंदाज़ करना लंबे समय में बड़े भू-राजनीतिक संकट को न्योता देना होगा।
भारत–बलूच रिश्तों पर संभावित असर
मीर यार बलूच के खुले समर्थन और कूटनीतिक सप्ताह की घोषणा से भारत–बलूच रिश्तों को नई दिशा मिलने की संभावना बढ़ी है। बलूच नेतृत्व लंबे समय से भारत सहित वैश्विक लोकतांत्रिक देशों से समर्थन की मांग करता रहा है, ताकि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और मानवाधिकार उल्लंघनों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया जा सके। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर भारत इस मौके को सावधानी और रणनीति के साथ उपयोग करता है, तो यह दक्षिण एशिया में उसके कूटनीतिक और सुरक्षा हितों को मजबूत कर सकता है।
