Pune News: महाराष्ट्र के पुणे स्थित पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस कमिश्नरेट में तैनात दो महिला कांस्टेबल इन दिनों अपने रिश्ते और शादी के प्लान को लेकर चर्चा में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों ने 30 अगस्त 2026 को अलंदी में होने वाली एक वैदिक सेरेमनी के लिए छुट्टी का आवेदन दिया है। खास बात यह है कि आवेदन के साथ शादी का इनविटेशन भी लगाया गया है।
परिवार ने जताई आपत्ति
मामला सामने आने के बाद एक महिला कांस्टेबल के परिवार ने इस रिश्ते पर आपत्ति जताई और पुलिस से दखल देने की मांग की। परिवार के कुछ सदस्य पुलिस अधिकारियों से भी मिले। हालांकि, अधिकारियों ने कथित तौर पर साफ किया कि दोनों बालिग हैं और अपनी मर्जी से रिश्ते में हैं। ऐसे में पुलिस उनकी निजी जिंदगी में जबरन हस्तक्षेप नहीं कर सकती। जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग की मदद जरूर दी जा सकती है।
एक साथ रहने से बढ़ी नजदीकियां
बताया जा रहा है कि दोनों कांस्टेबल महाराष्ट्र के अलग-अलग इलाकों से हैं। पुलिस ट्रेनिंग पूरी करने के बाद दोनों की पोस्टिंग पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस कमिश्नरेट में हुई। शुरुआत में वे पुलिस हेडक्वार्टर में दूसरी महिला कांस्टेबल के साथ रहती थीं। बाद में दोनों की पोस्टिंग एक ही पुलिस स्टेशन में हो गई।
जब उनके साथ रहने वाली दूसरी महिला कांस्टेबल वहां से चली गईं, तो दोनों साथ रहने लगीं। इसी दौरान उनकी दोस्ती धीरे-धीरे करीबी रिश्ते में बदल गई और आसपास के लोगों को भी उनके संबंध के बारे में जानकारी होने लगी।
30 अगस्त को अलंदी में सेरेमनी
रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों ने 30 अगस्त को अलंदी में वैदिक सेरेमनी की तैयारी की है। इसके लिए छुट्टी के आवेदन भी दिए गए हैं। हालांकि, यहां कानूनी स्थिति समझना जरूरी है। भारत में बालिग लोगों के बीच सहमति से समलैंगिक संबंध अपराध नहीं हैं, लेकिन मौजूदा कानून के तहत समलैंगिक विवाह को वैधानिक विवाह का दर्जा प्राप्त नहीं है।इसलिए निजी या धार्मिक समारोह और कानूनी रूप से मान्य विवाह, दोनों अलग-अलग बातें हैं।
जेंडर ट्रांजिशन भी चर्चा में
इस मामले का एक और पहलू जेंडर ट्रांजिशन से जुड़ा बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों में से एक कांस्टेबल जेंडर ट्रांजिशन से संबंधित इलाज करा रही हैं और इसके लिए मुंबई के एक बड़े अस्पताल में कई बार जा चुकी हैं। आगे चलकर दोनों अपने रिश्ते को कानूनी रूप देने की संभावना भी तलाश सकती हैं। हालांकि, यह आधिकारिक जेंडर रिकॉर्ड और उस समय लागू कानूनों पर निर्भर करेगा।
सुप्रीम कोर्ट का क्या रुख है?
समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2023 में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने मौजूदा कानूनों के तहत समलैंगिक विवाह को मान्यता देने से इनकार किया और कहा कि विवाह से जुड़े कानून बनाना संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है।
हालांकि, अदालत ने LGBTQIA+ लोगों की पसंद के व्यक्ति के साथ रिश्ते में रहने और अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने के अधिकारों पर भी जोर दिया। ऐसे में पुणे की इन दो महिला कांस्टेबल का मामला निजी पसंद, सामाजिक स्वीकार्यता और मौजूदा कानूनी व्यवस्था के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
