Bihar News: बिहार की राजधानी पटना में साइबर फ्रॉड से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस ने ऐसे तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनके बैंक खातों से करीब 25 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का पता चला। पुलिस के मुताबिक, ये रकम साइबर ठगी से जुड़ी हुई थी।
गिरफ्तार आरोपियों में प्रभाकर कुमार, अमित कुमार और दीपक कुमार रावत शामिल हैं। प्रभाकर और अमित कथित तौर पर रैपिडो चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। पुलिस जांच में सामने आया कि साइबर अपराधियों के संपर्क में आने के बाद दोनों ने अपने बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम रखने के लिए करना शुरू कर दिया।
किराए पर बैंक खाता और हर महीने कमीशन
पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपियों को अपने बैंक खाते उपलब्ध कराने के बदले हर महीने करीब 40 से 50 हजार रुपये तक कमीशन मिलता था। यानी साइबर ठगी करने वाले खुद सीधे इन खातों का इस्तेमाल करने के बजाय दूसरे लोगों के खातों में पैसा मंगवाते थे।
पुलिस के अनुसार, दीपक कुमार रावत लोगों के बैंक खाते खुलवाने में मदद करता था। इसके बाद इन खातों को साइबर अपराधियों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराया जाता था। खाते में ठगी की रकम आने के बाद संबंधित लोगों को कमीशन दिया जाता था।
छह महीने से चल रही थी जांच
पटना के अलग-अलग इलाकों से दो दर्जन से ज्यादा लोगों ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतों के बाद पुलिस ने उन मोबाइल नंबरों और बैंक खातों की जांच शुरू की, जिनसे लेनदेन जुड़ा था।
बताया गया कि करीब छह महीने की जांच के दौरान तीन संदिग्ध बैंक खातों में लगभग 25 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला। बैंक अधिकारियों के सहयोग से खातों की जांच की गई और पुलिस को इनके साइबर ठगी से जुड़े होने का संदेह मिला। इसके बाद खातों को फ्रीज कर दिया गया।
कई राज्यों तक जुड़े हो सकते हैं तार
पुलिस का कहना है कि यह मामला किसी छोटे गिरोह तक सीमित नहीं है। जांच में एक संगठित नेटवर्क के संकेत मिले हैं और इसके तार दूसरे राज्यों से भी जुड़े होने की बात सामने आई है।
फिलहाल पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में छापेमारी कर रही है। आगे की जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस नेटवर्क ने कितने लोगों को निशाना बनाया और कितने बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया गया।
