Priority Postpaid Plan : देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनी Airtel के ‘प्रायोरिटी पोस्टपेड’ प्लान को लेकर इन दिनों बहस तेज हो गई है। इस प्लान के लॉन्च के बाद सवाल उठने लगे कि क्या यह सेवा नेट न्यूट्रैलिटी के सिद्धांत के अनुरूप है या नहीं। इसी मुद्दे पर अब भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) और संसदीय समिति भी सक्रिय हो गई हैं।
Airtel ने अपने पक्ष में कहा है कि यह सेवा पूरी तरह से तकनीकी आधार पर तैयार की गई है और इसका उद्देश्य केवल ग्राहकों को बेहतर नेटवर्क अनुभव देना है। कंपनी का दावा है कि इससे अन्य उपभोक्ताओं की सेवा गुणवत्ता पर कोई असर नहीं पड़ता।
क्या है प्रायोरिटी पोस्टपेड प्लान?
पिछले महीने Airtel ने अपने पोस्टपेड ग्राहकों के लिए एक नया ‘प्रायोरिटी पोस्टपेड’ प्लान लॉन्च किया था। कंपनी के अनुसार, इस प्लान के तहत ग्राहकों को भीड़भाड़ वाले इलाकों और नेटवर्क पर अधिक दबाव वाले समय में भी बेहतर इंटरनेट स्पीड और अधिक स्थिर कनेक्टिविटी मिलेगी।
इसके लिए कंपनी 5G नेटवर्क स्लाइसिंग तकनीक का उपयोग कर रही है। इस तकनीक के जरिए नेटवर्क का एक विशेष हिस्सा कुछ ग्राहकों के लिए आरक्षित किया जाता है, जिससे उन्हें बेहतर प्रदर्शन मिल सके।
TRAI को Airtel ने क्या बताया?
Airtel ने TRAI को बताया कि उसका प्रायोरिटी पोस्टपेड प्लान कंटेंट-न्यूट्रल आधार पर काम करता है। कंपनी का कहना है कि किसी विशेष ऐप, वेबसाइट या सेवा को प्राथमिकता नहीं दी जाती। केवल नेटवर्क प्रबंधन के लिए तकनीकी स्तर पर सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस सेवा के कारण प्रीपेड या अन्य ग्राहकों के इंटरनेट अनुभव में किसी तरह की गिरावट नहीं आती है।
संसदीय समिति ने भी मांगा जवाब
26 मई को संसद की संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने भी इस मुद्दे पर दूरसंचार विभाग और TRAI से स्पष्टीकरण मांगा था। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली समिति ने चिंता जताई थी कि इस तरह के प्रायोरिटी प्लान कहीं करोड़ों प्रीपेड उपभोक्ताओं के हितों को प्रभावित न करें।
Jio ने उठाए सवाल
Airtel की प्रतिद्वंद्वी कंपनी Jio ने सुझाव दिया है कि ऐसी सेवाओं को लागू करने से पहले दूरसंचार विभाग और TRAI से स्पष्ट नियामकीय मंजूरी ली जानी चाहिए। कंपनी का मानना है कि इस तरह की तकनीकों के व्यापक प्रभावों का मूल्यांकन जरूरी है।
फिलहाल Airtel अपने प्लान का बचाव कर रही है, जबकि नियामक संस्थाएं और संबंधित पक्ष इस बात की जांच कर रहे हैं कि यह सेवा नेट न्यूट्रैलिटी के मौजूदा ढां
