Sita Navami 2026: वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इस दिन माता सीता के प्राकट्य दिवस के रूप में सीता नवमी का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेतायुग में इसी दिन देवी लक्ष्मी ने जनकपुरी में राजा जनक की पुत्री सीता के रूप में अवतार लिया था। इसलिए इस दिन माता सीता की विशेष पूजा करने की परंपरा है और मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
कब है सीता नवमी 2026?
पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि:
- शुरू: 24 अप्रैल 2026, शाम 07:22 बजे
- समाप्त: 25 अप्रैल 2026, शाम 06:28 बजे
चूंकि नवमी तिथि का सूर्योदय 25 अप्रैल 2026 को होगा, इसलिए इसी दिन सीता नवमी का व्रत और पूजा की जाएगी। इस दिन मानस, वृद्धि और पद्म नाम के तीन शुभ योग बनने से इस पर्व का महत्व और बढ़ जाएगा।
सीता नवमी 2026 शुभ मुहूर्त
25 अप्रैल, शनिवार को माता सीता की पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त:
- सुबह 11:01 बजे से दोपहर 01:38 बजे तक
यानी भक्तों को पूजा के लिए लगभग 2 घंटे 37 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा। इस दौरान विधि-विधान से पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
सीता नवमी पूजा विधि
सीता नवमी के दिन पूजा करने से पहले कुछ विशेष नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है:
1. स्नान और संकल्प करें
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
2. पूजा स्थल तैयार करें
घर के मंदिर में माता सीता और भगवान Rama की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
3. पूजन सामग्री अर्पित करें
माता सीता को रोली, अक्षत, फूल, फल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
4. मंत्र और कथा पाठ करें
सीता नवमी की कथा पढ़ें या सुनें और श्रीराम-सीता का ध्यान करें।
5. आरती और प्रसाद वितरण
पूजा के अंत में आरती करें और प्रसाद सभी में बांटें।
सीता नवमी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माता सीता की पूजा करने से:
- वैवाहिक जीवन सुखमय होता है
- घर में सुख-समृद्धि आती है
- संतान सुख की प्राप्ति होती है
- परिवार में शांति और सौभाग्य बना रहता है
इसलिए विवाहित महिलाएं विशेष रूप से इस दिन व्रत रखकर माता सीता और भगवान श्रीराम का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं।
