Delhi में इस साल आग लगने की घटनाओं में चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राजधानी में 2026 के पहले चार महीनों के दौरान आग से जुड़ी 7,800 से अधिक घटनाएं सामने आई हैं। इनमें से अकेले अप्रैल महीने में 2,300 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए, जो कुल घटनाओं का लगभग 30 प्रतिशत हैं। बढ़ती गर्मी और बिजली उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है।
पिछले साल के मुकाबले 20 फीसदी बढ़े मामले
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, Delhi Fire Services (DFS) को 27 अप्रैल तक कुल 7,801 आग की घटनाओं की सूचना मिली। यह आंकड़ा पिछले वर्ष इसी अवधि में दर्ज 6,511 घटनाओं की तुलना में 1,290 अधिक है। यानी इस साल आग लगने की घटनाओं में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
हालांकि अप्रैल महीने के आंकड़ों की तुलना करें तो 27 अप्रैल 2026 तक 2,375 घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 2,688 घटनाएं सामने आई थीं। इसके बावजूद मार्च की तुलना में अप्रैल में 837 अधिक घटनाएं रिपोर्ट हुईं, जो लगभग 54 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाती हैं।
जनवरी और फरवरी में भी दिखा उछाल
साल की शुरुआत से ही आग की घटनाओं में तेजी देखने को मिली। जनवरी में 1,396 फायर कॉल्स दर्ज की गईं, जो पिछले साल जनवरी के मुकाबले 49 प्रतिशत ज्यादा हैं। पिछले वर्ष जनवरी में यह आंकड़ा 938 था।
फरवरी में आग की घटनाओं में सबसे ज्यादा उछाल देखने को मिला। इस साल फरवरी में 2,492 कॉल्स दर्ज हुईं, जबकि पिछले साल इसी महीने 1,076 कॉल्स आई थीं। यानी फरवरी में आग की घटनाओं में 130 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हुई।
मार्च में थोड़ी राहत, लेकिन अप्रैल में फिर बढ़ा खतरा
मार्च महीने में आग की घटनाओं में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान 1,538 कॉल्स आईं, जबकि पिछले साल मार्च में यह संख्या 1,809 थी। यह करीब 15 प्रतिशत की कमी थी। लेकिन अप्रैल में तापमान बढ़ने के साथ ही आग की घटनाओं में फिर तेजी आ गई।
गर्मी और बिजली का बढ़ता लोड बना बड़ा कारण
DFS अधिकारियों के अनुसार, आग की घटनाओं में बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं। गर्मी के मौसम में एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य बिजली उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ जाता है, जिससे बिजली की वायरिंग और ट्रांसफॉर्मर पर दबाव बढ़ता है। ऐसे में शॉर्ट सर्किट की संभावना ज्यादा हो जाती है।
रोजाना 120 तक पहुंची फायर कॉल्स
अधिकारियों के मुताबिक, अप्रैल में औसतन रोजाना करीब 120 फायर कॉल्स आ रही हैं, जबकि इससे पहले यह संख्या 70 से 80 के बीच रहती थी। यह आंकड़ा बताता है कि राजधानी में आग का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
