Entertainment News: 70 के दशक में बॉलीवुड में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट अपनी पहचान बनाने वाले अलंकार जोशी आज फिल्मों से काफी दूर हैं। कभी उन्हें ‘मास्टर अलंकार’ के नाम से जाना जाता था। उन्होंने 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और अपनी एक्टिंग से दर्शकों के बीच खास जगह बनाई।
अलंकार की सबसे यादगार भूमिकाओं में 1975 की फिल्म ‘दीवार’ का छोटा विजय शामिल है। इस फिल्म में उन्होंने अमिताभ बच्चन के किरदार विजय का बचपन निभाया था। इसके अलावा वह ‘सीता और गीता’ और ‘मजबूर’ जैसी फिल्मों में भी नजर आए।
अमिताभ बच्चन ने खुद सुझाया था नाम
‘दीवार’ में अलंकार को छोटा विजय बनाने की कहानी भी काफी दिलचस्प है। बताया जाता है कि उनकी मुलाकात फिल्ममेकर यश चोपड़ा से हुई थी। इसी दौरान अमिताभ बच्चन की नजर अलंकार पर पड़ी और उन्होंने उन्हें अपने किरदार के बचपन का रोल देने का सुझाव दिया।
अलंकार ने अमिताभ की एक्टिंग को बेहद करीब से देखा और उनके हाव-भाव तक कॉपी करने की कोशिश की। एक सीन में अमिताभ ने जिस तरह शर्ट में गांठ लगाई, अलंकार ने भी उसे नोटिस किया और वैसा ही करने की इच्छा जताई थी।
बड़े हुए तो बदली फिल्मी दुनिया
चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर मिली सफलता के बाद जब अलंकार बड़े हुए तो उन्हें एक्टिंग में पहले जैसी आसानी से भूमिकाएं नहीं मिलीं। उन्होंने फिल्मों से जुड़े दूसरे काम भी किए और डायरेक्शन व प्रोडक्शन में हाथ आजमाया।
लेकिन अलंकार ने अपनी पढ़ाई को कभी नजरअंदाज नहीं किया। उन्हें पता था कि फिल्मी करियर हमेशा एक जैसा नहीं रहता। इसी सोच ने आगे चलकर उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी।
अमेरिका जाकर टेक इंडस्ट्री में बनाया बड़ा नाम
अलंकार जोशी ने आखिरकार अमेरिका का रुख किया और सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में करियर शुरू किया। उन्होंने करीब दो साल एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम किया। इसके बाद दोस्त के साथ मिलकर अपनी कंपनी शुरू की।
बताया जाता है कि उनका बिजनेस काफी सफल रहा और उन्होंने टेक की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी अनुमानित नेटवर्थ करीब ₹200 करोड़ बताई जाती है।
बेटियां भी हैं हॉलीवुड से जुड़ी
अलंकार की जिंदगी का एक और दिलचस्प पहलू उनका परिवार है। उनकी बहन अभिनेत्री पल्लवी जोशी भी फिल्म और टेलीविजन की जानी-मानी हस्ती हैं। वहीं उनकी बेटियां भी हॉलीवुड और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से जुड़ी हुई हैं।
अलंकार जोशी की कहानी बताती है कि बचपन की शोहरत जिंदगी की आखिरी मंजिल नहीं होती। सही समय पर लिया गया फैसला और नई चीज सीखने की इच्छा इंसान को बिल्कुल अलग क्षेत्र में भी बड़ी सफलता दिला सकती है।
