Bollywood News: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और कॉमेडियन जगदीप का जीवन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। उनका असली नाम सय्यद इश्तियाक अहमद जाफरी था। एक समय ऐसा था जब उनके पास खाने तक के पैसे नहीं थे और मुंबई की सड़कों पर साबुन, कंघी और पतंग बेचकर गुजारा करना पड़ता था। लेकिन मेहनत और लगन ने उन्हें हिंदी सिनेमा का यादगार चेहरा बना दिया।
गरीबी ने बदली जिंदगी
जगदीप का जन्म 29 मार्च 1939 को मध्य प्रदेश के दतिया में एक संपन्न परिवार में हुआ था। उनके पिता महाराजा के वकील थे, लेकिन बचपन में ही पिता का निधन हो गया। फिर 1947 के बंटवारे के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई और उनकी मां उन्हें लेकर मुंबई आ गईं।
मुंबई में हालात इतने कठिन थे कि कई रातें उन्होंने पुल के नीचे और फुटपाथ पर बिताईं। छोटी उम्र में ही उन्होंने घर चलाने के लिए गलियों में घूम-घूमकर सामान बेचना शुरू कर दिया।
सिर्फ 6 रुपये से शुरू हुआ फिल्मी सफर
किस्मत ने तब करवट ली जब सड़क पर सामान बेचते हुए उन्हें 1951 की फिल्म ‘अफसाना’ में छोटा सा रोल मिला। पहले उन्हें 3 रुपये मिलने थे, लेकिन उनके अभिनय से खुश होकर फीस बढ़ाकर 6 रुपये कर दी गई। यही छोटी शुरुआत आगे चलकर बड़े करियर में बदल गई।
बाद में उन्होंने ‘दो बीघा जमीन’, ‘शोले’ और कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया। खासतौर पर ‘सूरमा भोपाली’ का उनका किरदार आज भी लोगों को याद है।
तीन शादियां और 33 साल छोटी पत्नी
जगदीप की निजी जिंदगी भी काफी चर्चाओं में रही। उन्होंने तीन शादियां कीं। दूसरी पत्नी सुगरा बेगम से उनके दो बेटे हुए जावेद जाफरी और नावेद जाफरी।
उनकी तीसरी शादी सबसे ज्यादा सुर्खियों में रही। उन्होंने नाजिमा नाम की लड़की से निकाह किया, जो उनसे करीब 33 साल छोटी थीं। दोनों की मुलाकात पारिवारिक बातचीत के दौरान हुई और उम्र के बड़े अंतर के बावजूद उन्होंने शादी कर ली। इस रिश्ते से उनकी बेटी मुस्कान जाफरी हुईं।
शादी के बाद परिवार में आई दूरी
इस शादी के बाद परिवार में तनाव बढ़ गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जावेद जाफरी ने कई सालों तक उनसे दूरी बनाए रखी। बाद में रिश्तों में सुधार जरूर आया, लेकिन यह दौर उनके लिए काफी मुश्किल रहा।
आखिरी दौर और विरासत
1988 में जगदीप ने ‘सूरमा भोपाली’ फिल्म का निर्देशन किया, लेकिन यह बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो पाई। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान भी हुआ। 8 जुलाई 2020 को 81 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।
आज भी जगदीप को एक ऐसे कलाकार के रूप में याद किया जाता है, जिसने गरीबी, संघर्ष और निजी उतार-चढ़ाव के बावजूद लोगों को जिंदगी भर हंसाया।
