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अटल-आडवाणी से मुलाकात, BJP में एंट्री और फिर राजनीति से दूरी, सुरेश ओबेरॉय ने बताया सच

Bollywood News: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सुरेश ओबेरॉय ने अपने करियर में अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर खास पहचान बनाई है। हालांकि, एक्टिंग की दुनिया में सफल होने के बावजूद एक समय ऐसा भी आया था जब उन्होंने राजनीति में कदम रखने के बारे में गंभीरता से सोचा था। हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने उस दौर को याद करते हुए कई बातें साझा कीं।

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सुरेश ओबेरॉय के मुताबिक, करीब 2004 के आसपास उनके एक पुराने कॉलेज दोस्त ने उन्हें भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की सलाह दी थी। दोस्त की बात मानकर वह BJP कार्यालय पहुंचे और वहां पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात भी हुई। इस दौरान उनकी मुलाकात लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे बड़े नेताओं से कराई गई।

गुरु की डांट ने बदल दिया फैसला

सुरेश ओबेरॉय ने बताया कि जब उनके गुरु को राजनीति में जाने की उनकी योजना के बारे में पता चला तो वह काफी नाराज हुए। उन्होंने अभिनेता को कड़ी चेतावनी देते हुए राजनीति से दूर रहने की सलाह दी।

गुरु की इस डांट का सुरेश ओबेरॉय पर गहरा असर पड़ा। हालांकि, उन्होंने कुछ समय तक राजनीतिक गतिविधियों से जुड़कर इसे समझने की कोशिश की, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें महसूस होने लगा कि यह दुनिया उनके लिए सही नहीं है।

राजनीति के माहौल में नहीं लगा मन

अभिनेता ने बताया कि उन्हें राजनीतिक माहौल में अंदर से खुशी नहीं मिल रही थी। उन्हें वहां की परिस्थितियां और लोगों का व्यवहार सहज नहीं लगा। इसके बाद उन्होंने खुद ही राजनीति से दूरी बनाने का फैसला किया।

उनका कहना था कि शुरुआत में उन्हें लगता था कि राजनीति देश की सेवा करने का एक अच्छा माध्यम है, लेकिन बाद में उन्हें इसकी वास्तविकता अलग नजर आई। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह हर राजनेता को एक ही नजर से नहीं देखते।

मोदी, शाह और योगी को लेकर क्या बोले?

सुरेश ओबेरॉय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने साफ कहा कि इन नेताओं से उन्हें कोई शिकायत नहीं है।

उनकी आपत्ति कुछ ऐसे लोगों को लेकर थी जो इन बड़े नेताओं के आसपास रहते हैं। अभिनेता के मुताबिक, उन्हें कुछ लोगों की ईमानदारी और व्यवहार सहज नहीं लगा। इसी अनुभव के बाद उन्होंने तय किया कि राजनीति उनके लिए सही रास्ता नहीं है।

एक्टिंग को ही बनाया अपना रास्ता

राजनीति से दूरी बनाने के बाद सुरेश ओबेरॉय ने अपना पूरा ध्यान अभिनय पर लगाया। उन्होंने फिल्मों और टीवी में लगातार काम किया और अपनी पहचान मजबूत की। उनके इस पुराने अनुभव से यह भी पता चलता है कि किसी भी क्षेत्र में जाने से पहले अपने मन की सुनना कितना जरूरी हो सकता है।

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