Entertainment News:आज जब भी बॉलीवुड के दिग्गज कलाकारों की बात होती है तो गोविंदा का नाम जरूर लिया जाता है। अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग, बेहतरीन डांस और दमदार अभिनय से उन्होंने करोड़ों लोगों का दिल जीता। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उनके पिता अरुण कुमार आहूजा भी अपने दौर के बड़े सुपरस्टार थे।
1939 से शुरू हुआ था शानदार फिल्मी सफर
अरुण कुमार आहूजा ने साल 1939 में फिल्म ‘एक ही रास्ता’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने 40 से अधिक फिल्मों में मुख्य और सहायक भूमिकाएं निभाईं। मशहूर फिल्मकार महबूब खान ने उन्हें फिल्मों में बड़ा मौका दिया और उनकी फिल्म ‘औरत’ ने उन्हें अलग पहचान दिलाई।उनकी लोकप्रियता उस दौर में काफी ज्यादा थी और वे अभिनय के साथ-साथ अपनी गायकी के लिए भी जाने जाते थे।
फिल्म निर्माण का फैसला पड़ा भारी
अभिनेता के रूप में सफलता मिलने के बाद अरुण कुमार ने फिल्म निर्माण में कदम रखा। हालांकि यह फैसला उनके जीवन का सबसे कठिन मोड़ साबित हुआ।उन्होंने जिस फिल्म का निर्माण किया, वह बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गई। फिल्म में लगा सारा पैसा डूब गया और आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई कि उन्हें अपना आलीशान जीवन छोड़ना पड़ा।
विरार की चॉल में बिताने पड़े कठिन दिन
आर्थिक संकट के चलते अरुण कुमार आहूजा का परिवार मुंबई के बांद्रा से विरार की एक साधारण चॉल में रहने के लिए मजबूर हो गया। इसी दौरान उनकी तबीयत भी लगातार खराब रहने लगी।घर की जिम्मेदारी उनकी पत्नी निर्मला देवी, जो अपने समय की प्रसिद्ध गायिका थीं, ने संभाली। उन्होंने दोबारा अपने संगीत करियर की शुरुआत की और परिवार को आर्थिक रूप से सहारा दिया।
गुमनामी में हुआ दुखद अंत
आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव का असर अरुण कुमार के स्वास्थ्य पर पड़ा। बताया जाता है कि वे लगभग दस वर्षों तक बीमार रहे। आखिरकार 3 जुलाई 1998 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। कभी करोड़ों दिलों पर राज करने वाले इस कलाकार ने जीवन के अंतिम दिन गुमनामी और संघर्ष के बीच बिताए।उनकी कहानी इस बात का उदाहरण है कि फिल्म इंडस्ट्री में सफलता और असफलता के बीच की दूरी बहुत कम होती है।
