Entertainment News: अपनी सुरीली आवाज से दशकों तक करोड़ों लोगों के दिलों पर राज करने वाले मशहूर गायक सोनू निगम ने हाल ही में अपने करियर के सबसे कठिन दौर को याद किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने सिंगर्स के अधिकार, कॉपीराइट और रॉयल्टी के मुद्दे पर खुलकर आवाज उठाई, तब उन्हें म्यूजिक इंडस्ट्री की बड़ी कंपनियों के विरोध का सामना करना पड़ा। इतना ही नहीं, कई प्रोजेक्ट्स से उनकी रिकॉर्ड की गई आवाज तक हटाकर दूसरे गायकों से गाने रिकॉर्ड करवाए गए।
सिंगर्स के हक के लिए उठाई आवाज
सोनू निगम लंबे समय से कलाकारों को उनके काम का उचित सम्मान और रॉयल्टी मिलने की मांग करते रहे हैं। उन्होंने बताया कि कुछ ऐसे कॉन्ट्रैक्ट थे जो सिंगर्स के हित में नहीं थे और उन्होंने उन पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद इंडस्ट्री में उनके खिलाफ माहौल बन गया और कई बड़ी म्यूजिक कंपनियों ने उनसे दूरी बना ली।
एक इंटरव्यू के दौरान सोनू ने कहा कि उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी कि हालात इतने खराब हो जाएंगे। उन्हें विश्वास था कि बातचीत से समाधान निकल आएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
स्टेज शो बने सबसे बड़ा सहारा
जब नए गानों के मौके कम होने लगे, तब सोनू निगम ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपना पूरा ध्यान लाइव कॉन्सर्ट और स्टेज परफॉर्मेंस पर लगाया। उन्होंने महसूस किया कि कोई भी कंपनी उन्हें अपने चाहने वालों से मिलने और गाने से नहीं रोक सकती।
यही दौर उनके लिए नई शुरुआत साबित हुआ। देश-विदेश में उनके लाइव शो लगातार लोकप्रिय होते गए और उन्होंने अपने प्रशंसकों से जुड़ाव बनाए रखा।
कॉपीराइट कानून में बदलाव बना बड़ी जीत
सोनू निगम का मानना है कि यह लड़ाई केवल उनके लिए नहीं, बल्कि पूरी सिंगिंग कम्युनिटी के लिए थी। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय लता मंगेशकर भी कलाकारों के अधिकारों की बात करती थीं, लेकिन यह अभियान पूरी तरह आगे नहीं बढ़ पाया था।
साल 2012 में भारत के कॉपीराइट कानून में बदलाव के बाद म्यूजिक इंडस्ट्री में बड़ा परिवर्तन देखने को मिला। इसके बाद कलाकारों को रॉयल्टी मिलने का रास्ता मजबूत हुआ और कंपनियों ने भी इस व्यवस्था को अपनाना शुरू किया।
आज रिश्ते पहले से बेहतर
सोनू निगम ने बताया कि समय के साथ हालात पूरी तरह बदल गए। जिन कंपनियों ने कभी उनके साथ काम करना बंद कर दिया था, वही आज फिर उनके साथ काम कर रही हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने उन लोगों को माफ कर दिया है, तो उन्होंने विनम्रता से कहा कि वह किसी को माफ करने या दोष देने वाले व्यक्ति नहीं हैं।
सोनू निगम की यह कहानी बताती है कि सही बात के लिए खड़े होने में मुश्किलें जरूर आती हैं, लेकिन अगर इरादे मजबूत हों तो बदलाव संभव है। आज म्यूजिक इंडस्ट्री में सिंगर्स को जो रॉयल्टी और अधिकार मिल रहे हैं, उसमें इस लंबी लड़ाई का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।
