Entertainment News: टीवी के लोकप्रिय शो ‘पवित्र रिश्ता’ में कड़क सासू मां का किरदार निभाकर घर-घर पहचान बनाने वाली दिग्गज अभिनेत्री उषा नाडकर्णी इन दिनों अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं। पर्दे पर सख्त और मजबूत दिखाई देने वाली यह अभिनेत्री असल जिंदगी में कई मुश्किल दौर से गुजरी हैं। हाल ही में दिए इंटरव्यू और पॉडकास्ट में उन्होंने अपनी जिंदगी के कई ऐसे पहलुओं का जिक्र किया, जिन्हें सुनकर हर कोई भावुक हो गया।
1987 से अकेले रह रही हैं एक्ट्रेस
उषा नाडकर्णी ने बताया कि वह साल 1987 से मुंबई में अकेली रह रही हैं। समय के साथ उनके भाई-बहनों का निधन हो गया और पति से भी उनका रिश्ता बहुत पहले खत्म हो चुका था। शुरुआती दिनों में अकेले रहने से उन्हें काफी डर लगता था। वह वॉचमैन से घर के दरवाजे तक साथ चलने के लिए कहती थीं। हालांकि अब उन्होंने अकेलेपन को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लिया है।
उन्होंने मुस्कुराते हुए लेकिन भावुक अंदाज में कहा कि अगर कभी उनकी नींद में मौत हो जाए तो पड़ोसी सिर्फ इतना सोचेंगे कि “आज बुढ़िया ने दरवाजा नहीं खोला।”
बेटे की बात आज भी करती है परेशान
अभिनेत्री ने अपने बेटे के बारे में भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि अभिनय की व्यस्तता के कारण उनका बेटा अपनी नानी के पास बड़ा हुआ। इसी वजह से मां-बेटे के रिश्ते में वह अपनापन नहीं बन पाया जिसकी उन्हें उम्मीद थी।
उषा नाडकर्णी के मुताबिक, उनका बेटा आज भी उनसे कहता है, “आपने सिर्फ मुझे जन्म दिया, मेरी असली मां तो नानी थीं।” यह बात उन्हें आज भी भीतर तक दुख पहुंचाती है।
बचपन भी रहा बेहद मुश्किल
उषा नाडकर्णी ने बताया कि उनके पिता एयरफोर्स में अधिकारी थे और उनका स्वभाव काफी सख्त था। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करना आम बात थी। उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि भाई को बचाने के दौरान उनके पिता ने उन पर धारदार हथियार से हमला कर दिया था, जिससे उनके हाथ में गंभीर चोट आई थी। इसके बावजूद उन्होंने अगले ही दिन अपने नाटक का प्रदर्शन किया।
परिवार ने नहीं किया था एक्टिंग का समर्थन
एक्ट्रेस ने बताया कि बचपन से उन्हें अभिनय का शौक था, लेकिन परिवार इसके खिलाफ था। जब उन्होंने अपने सपनों की बात घर में रखी तो उनकी मां ने उनका सामान घर से बाहर फेंक दिया था। कुछ दिन उन्हें अपनी दोस्त के घर रहना पड़ा। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते हुए हिंदी और मराठी मनोरंजन जगत में अपनी अलग पहचान बनाई।
संघर्षों के बीच भी कायम है हौसला
80 वर्ष की उम्र में भी उषा नाडकर्णी अपने आत्मविश्वास और स्वाभिमान के साथ जिंदगी जी रही हैं। उनकी कहानी यह बताती है कि सफलता के पीछे अक्सर ऐसे संघर्ष छिपे होते हैं, जिनके बारे में दुनिया बहुत कम जानती है। आज भी उनके अनुभव लाखों लोगों के लिए प्रेरणा और भावनात्मक सीख दोनों हैं।
