पोंगल दक्षिण भारत का प्रसिद्ध फसल उत्सव है। यह त्योहार आमतौर पर मकर संक्रांति के समय मनाया जाता है। पोंगल का मतलब होता है “उबालना” और यह त्योहार नई फसल के स्वागत का प्रतीक है। इस मौके पर घर में पारंपरिक पकवान बनाना सबसे खास होता है। इन व्यंजनों के बिना पोंगल का त्योहार अधूरा लगता है। पोंगल की थाली में मिठास, नमकीन और सब्जियों का संतुलन होता है। ये पकवान न सिर्फ स्वाद में अच्छे होते हैं बल्कि पोषण से भी भरपूर होते हैं।
सक्कराई पोंगल (मीठा पोंगल)
सक्कराई पोंगल पोंगल का सबसे प्रसिद्ध व्यंजन है। इसे चावल, मूंग दाल और गुड़ से बनाया जाता है। गुड़ को पानी में घोलकर सिरप बनाते हैं और फिर चावल-दाल के मिश्रण में मिलाते हैं। इसके ऊपर घी में भुने काजू, किशमिश और इलायची पाउडर डाले जाते हैं। यह पकवान मिठास और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
वेन पोंगल (नमकीन पोंगल)
वेन पोंगल या नमकीन पोंगल स्वाद में हल्का और पौष्टिक होता है। इसे चावल और मूंग दाल को उबालकर बनाया जाता है। फिर घी में काली मिर्च, जीरा, करी पत्ते और अदरक डालकर इसे भुनते हैं। हल्का सा नमक मिलाकर इसे परोसा जाता है। यह पकवान सादगी और पोषण का अच्छा मिश्रण है।
पायसम (खीर)
पायसम पोंगल में मिठाई के रूप में परोसा जाता है। इसे चावल, दूध और गुड़ या चीनी से बनाया जाता है। धीमी आंच पर इसे पकाकर तैयार किया जाता है। ऊपर काजू और किशमिश डालकर इसका स्वाद बढ़ाया जाता है। पायसम घर में त्योहार की खुशियों की मिठास बढ़ाता है।
अवियल
अवियल एक पारंपरिक सब्जी व्यंजन है। इसमें कई तरह की सब्जियाँ, नारियल और दही मिलाकर पकाया जाता है। यह थाली में पोषण और रंग का संतुलन लाता है। हर उम्र के लोग इसे पसंद करते हैं।
अन्य पकवान
पोंगल में इन पांच प्रमुख व्यंजनों के अलावा तामारिंड चावल, दही चावल और वड़ा जैसे व्यंजन भी बनते हैं। ये पकवान त्योहार की थाली को और भी आकर्षक और स्वादिष्ट बनाते हैं।
पोंगल के पकवानों का महत्व
पोंगल के पकवान केवल खाने के लिए नहीं होते। ये नई फसल का स्वागत, परिवार की खुशियाँ और कृतज्ञता दिखाने का प्रतीक होते हैं। परिवार के सभी सदस्य मिलकर इन्हें बनाते हैं और पहले भगवान को भोग अर्पित करते हैं। इसके बाद पकवान घर के सदस्यों और मेहमानों के साथ बांटे जाते हैं। यही वजह है कि पोंगल सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि साझा खुशियों का पर्व बन जाता है।
