पूरन पोली एक पारंपरिक भारतीय मीठा फ्लैटब्रेड है, जिसे खासकर महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में त्योहारों पर बड़े चाव से बनाया जाता है। इसका नाम दो शब्दों से मिलकर बना है — “पूरन” यानी मीठा भरावन और “पोली/पोलि” यानी रोटी या फ्लैटब्रेड। यह पकवान चने की दाल (या कभी-कभी तुअर दाल) से बनी मीठी फिलिंग के साथ तैयार किया जाता है, जिसे आटे की रोटी में भरकर तवे पर घी लगाकर सेक लिया जाता है।
पारंपरिक सामग्री और जरूरी सामान
पूरन पोली बनाने के लिए दो भागों में सामग्री को विभाजित किया जाता है — भरावन (पूरन) और बाहरी आटा (पोली)।
भरावन (पूरन) के लिए मुख्य सामग्री:
- चने की दाल (चना दाल) – लगभग 1 कप
- गुड़ या चीनी – स्वादानुसार
- इलायची पाउडर और जायफल – खुशबू और स्वाद के लिए
- पानी (दाल उबालने के लिए)
बाहरी आटा (पोली) के लिए:
- गेहूं का आटा या मैदा (या दोनों का मिश्रण)
- घी या तेल
- नमक (थोड़ी मात्रा में)
- पानी (आटा गूंथने के लिए)
पूरन पोली की खास बात यह है कि यह मीठे और खुशबूदार स्वाद के साथ साथ पौष्टिकता भी देती है, क्योंकि दाल प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत होती है।
Step-by-Step विधि (Method)
सबसे पहले चने की दाल को अच्छी तरह से धोकर 30 मिनट तक भिगो दें। इसके बाद दाल को प्रेशर कुकर या गैस पर मध्यम आंच पर तब तक पकाएं जब तक वह नरम न हो जाए और पानी लगभग सोख ले। दाल को छानकर अच्छी तरह मस-कर तैयार करें। अब इसी दाल में गुड़/चीनी डालें और इसे धीमी आंच पर तब तक पकाएं जब तक मिश्रण गाढ़ा और सूखा न हो जाए। इसमें इलायची और जायफल पाउडर मिलाकर स्वाद और सुगंध बढ़ा सकते हैं। इस मीठे मिश्रण को ठंडा होने के लिए अलग रख दें।
एक बाउल में आटा लें, इसमें थोड़ा सा नमक और घी मिलाएं। धीरे-धीरे पानी डालते हुए एक नरम लेकिन सख्त आटा तैयार करें। इस आटे को 15-20 मिनट ढककर रख दें ताकि वह थोड़ा आराम से फैल सके। अब आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाएं। हर लोई को थोड़ा फैलाकर उसकी बीच में तैयार भरावन (पूरन) रखें और किनारों को बंद करते हुए एक गेंद बनाएं। इस गेंद को हल्का बेलकर पतली पूरन पोली जैसा आकार दें। तवा गर्म करें और उस पर पूरन पोली रखें, दोनों तरफ घी लगाकर सुनहरा भूरा और क्रिस्पी होने तक सेंक लें। घी डालने से उसकी खुशबू और मिठास और बढ़ जाती है।
परोसने के सुझाव और सांस्कृतिक महत्व
पूरन पोली को परोसते समय गर्म-गर्म इसके ऊपर ताज़ा घी डालना इसे और भी लजीज बनाता है। यह खास तौर पर गणेश चतुर्थी, होली, दिवाली, गुड़ी पड़वा और अन्य धार्मिक/पारिवारिक अवसरों पर तैयार की जाती है, क्योंकि मिठास और पारंपरिक स्वाद परिवार और मेहमानों दोनों को पसंद आता है।
महाराष्ट्र में इसे अक्सर काटची आमटी या गरम दूध के साथ परोसा जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी यादगार बन जाता है।
टिप्स (Cooking Tips)
- दाल को नरम पकाना पूरन पोली का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है; अगर दाल ठीक से न पकाई जाए तो फिलिंग बारीक नहीं बन पाएगी।
- आटा को ढंककर थोड़ा आराम देना इसे रोल करने में मदद करता है।
- घी से पकाने और परोसने से स्वाद और तनिक पौष्टिकता भी बढ़ती है।
