World Arthritis Day 2022: गठिया एक बेहद दर्दनाक बीमारी है जिसकी वजह से जोड़ों में बहुत ज्यादा जर्द होता है। कुछ लोगों में ये तकलीफ इतनी बढ़ जाती है कि जॉइंट्स बेकार हो जाते है। यहां तक कि सर्जरी की नौबत आ जाती है। लेकिन अगर समय रहते इसे कंट्रोल किया जाए तो कोई परेशानी नहीं होगी। अर्थराइटिस में जॉइंट पेन, सूजन के साथ जोड़ों में परमानेंट डैमेज तक हो सकता है इसके लिए लोग दवाओं से लेकर घरेलू उपचारों तक की मदद ले सकते हैं। आयुर्वेदिक में भी कुछ टिप्स हैं जो गठिया के ट्रीटमेंट और इसे मैनेज करने में आपकी मदद कर सकते हैं।
क्या है पारंपरिक इलाज?
गठिया के पारंपरिक इलाज में दर्द को कम करने के लिए पेन किलर दवाएं, दर्द और सूजन दोनों को कम करने के लिए नॉनस्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं और सूजन को कम करने और इम्यून सुस्टन को दबाने के लिए कॉर्टिकोस्टेरॉइड शामिल हैं।
लंबे समय तक चलती है दवा
गठया रोगी को लंबे समय तक दवाओं के इस्तेमाल के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसके लिए फिजियोथेरेपी जोड़ों के आसपास की मांसपेशियों को मजबूत करने और गति की सीमा में सुधार करने के लिए मददगार है।
क्या कहता है आयुर्वेद?
आयुर्वेद के अनुसार इसके तीन प्रकार होते हैं। अमावत, संधिवात और वातरक्ता । प्राचीन विज्ञान का मानना है कि शरीर में घूमने वाले अतिरिक्त वात या अमा जोड़ों में जमा हो जाते हैं जिससे सूजन पैदा होती है और इसी वजह से गठिया होता है।
गठिया होने की वजह
– अमावत या रुमेटीइड गठिया अनुचित पाचन के कारण अमा नामक मेटाबॉलिज्म अपशिष्ट के गठन का परिणाम है
– ऑस्टियोआर्थराइटिस शरीर में वात बढ़ने के कारण होता है।
गठिया से छुटकारे के लिए मैनेज करें डायट
– रोजाना खाना खाएं
– एसिडिक खाने से बचें
– बिना पॉलिश किए लंबे दाने वाले चावल या लाल चावल, जौ औरबाजरा फायदेमंद होते हैं।
– हरी सब्जियां, लौकी, करेला अच्छे ऑप्शन हैं।
– सेब, पपीता और अमरूद जैसे ताजे फल शामिल करें।