CM Vijay wants neet scrapped: तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों एक नया मुद्दा तेजी से चर्चा में है। अभिनेता से मुख्यमंत्री बने थलापति विजय ने NEET परीक्षा को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने देशभर के छात्रों और अभिभावकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। NEET-UG 2026 परीक्षा के पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद विजय ने खुलकर कहा कि “NEET को जड़ से खत्म कर देना चाहिए।”उनका यह बयान सिर्फ राजनीतिक नहीं माना जा रहा, बल्कि युवाओं की नाराजगी को आवाज देने वाला कदम बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी विजय के समर्थन में हजारों पोस्ट सामने आ रहे हैं। खासकर वे छात्र जो महंगी कोचिंग और लगातार बदलती परीक्षा व्यवस्था से परेशान हैं, उन्हें विजय की बात काफी पसंद आ रही है।
12वीं के नंबरों से एडमिशन का सुझाव
थलापति विजय का मानना है कि मेडिकल कॉलेजों में दाखिला 12वीं कक्षा के बोर्ड अंकों के आधार पर होना चाहिए। उनका तर्क है कि इससे कोचिंग सेंटरों का दबदबा कम होगा और ग्रामीण या गरीब परिवारों के बच्चों को भी डॉक्टर बनने का समान मौका मिलेगा।विजय ने कहा कि बार-बार पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है। छात्रों का मानसिक तनाव बढ़ता है और परिवारों पर आर्थिक बोझ भी पड़ता है। ऐसे में मौजूदा व्यवस्था पर दोबारा सोचने की जरूरत है।
तमिलनाडु में पहले से रहा है विरोध
तमिलनाडु में NEET का विरोध कोई नया मुद्दा नहीं है। राज्य की कई सरकारें पहले भी इस परीक्षा के खिलाफ आवाज उठा चुकी हैं। राज्य का कहना रहा है कि NEET शहरी और अमीर छात्रों को ज्यादा फायदा पहुंचाती है, जबकि सरकारी स्कूलों और क्षेत्रीय भाषा के छात्रों के लिए यह चुनौतीपूर्ण बन जाती है।इसी वजह से राज्य विधानसभा में NEET छूट विधेयक भी पारित किया गया था। विजय अब उसी बहस को और तेज करते नजर आ रहे हैं।
क्या बोर्ड मार्क्स वाला फॉर्मूला आसान है?
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ 12वीं के अंकों के आधार पर मेडिकल एडमिशन देना आसान नहीं होगा। देशभर में अलग-अलग बोर्डों का मूल्यांकन सिस्टम अलग है। कहीं छात्रों को ज्यादा नंबर मिलते हैं तो कहीं बहुत सख्त जांच होती है।ऐसे में एक समान मेरिट लिस्ट बनाना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा यह डर भी है कि स्कूलों में “नंबरों की होड़” और बढ़ सकती है।
युवाओं के बीच बढ़ रही लोकप्रियता
फिर भी इतना तय माना जा रहा है कि थलापति विजय ने युवाओं के सबसे संवेदनशील मुद्दे को मजबूती से उठाया है। NEET विवाद के बीच उनका यह स्टैंड उन्हें छात्रों के बीच तेजी से लोकप्रिय बना रहा है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार और बाकी राज्य इस बहस पर क्या रुख अपनाते हैं।
