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Indian Army: मणिपुर में शहीद हुए चंद्र मोहन सिंह रावत को नम आंखों से अंतिम विदाई, गाजियाबाद में उमड़ा जनसैलाब

Indian Army: मणिपुर में उग्रवादी हमले में शहीद हुए असम राइफल्स के हवलदार चंद्र मोहन सिंह रावत का पार्थिव शरीर बुधवार देर रात गाजियाबाद के नंदग्राम स्थित उत्तरांचल नगर स्थित उनके आवास पहुंचा। तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर के पहुंचते ही पूरा इलाका गमगीन हो गया। ‘भारत माता की जय’ और ‘शहीद चंद्र मोहन सिंह रावत अमर रहें’ के नारों के बीच लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की।

अंतिम दर्शन के दौरान भावुक हुआ परिवार

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पार्थिव शरीर घर पहुंचते ही शहीद की पत्नी मंजू देवी पति को अंतिम बार देखकर बेसुध हो गईं। बेटियां रितिका और यशिका पिता के पार्थिव शरीर से लिपटकर रो पड़ीं, जबकि बेटे राहुल ने नम आंखों से पिता को अंतिम सलामी दी। परिवार की पीड़ा देखकर वहां मौजूद रिश्तेदार, पड़ोसी और स्थानीय लोग भी भावुक हो उठे। देर रात तक अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उनके घर के बाहर जुटी रही।

2008 से गाजियाबाद में रह रहा था परिवार

मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के कुकलियाल गांव निवासी चंद्र मोहन सिंह रावत वर्ष 2008 से गाजियाबाद में रह रहे थे। वर्ष 2018 से उनका परिवार उत्तरांचल नगर स्थित अपने मकान में निवास कर रहा था। शहीद के भतीजे आशीष रावत ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार हरनंदी मोक्ष स्थल पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।

पिता के निधन के कुछ दिन बाद हुए शहीद

परिवार पर दुखों का पहाड़ इसलिए भी टूटा क्योंकि तीन जून को ही शहीद के पिता का निधन हुआ था। पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए वह छुट्टी पर घर आए थे। अवकाश समाप्त होने के बाद तीन जुलाई को वह ड्यूटी के लिए रवाना हुए और पांच जुलाई को यूनिट में कार्यभार संभाला। इसके कुछ ही दिन बाद मणिपुर में उग्रवादियों के हमले में देश की रक्षा करते हुए उन्होंने सर्वोच्च बलिदान दे दिया।

परिवार ने 35 दिन में खो दिए दो सहारे

महज 35 दिनों के भीतर परिवार ने पहले पिता और फिर बेटे को खो दिया। शहीद अपने पीछे पत्नी मंजू देवी, बेटा राहुल और दो बेटियां रितिका व यशिका को छोड़ गए हैं। उनके पार्थिव शरीर के सामने परिवार का विलाप हर किसी की आंखें नम कर गया। स्थानीय लोगों ने शहीद के साहस और देशभक्ति को नमन करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

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