Lucknow News: लखनऊ में निजी स्कूलों की मनमानी पर प्रशासन अब सख्त रुख अपनाने जा रहा है। मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने और अभिभावकों को निर्धारित दुकानों से किताबें, कॉपियां और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर करने के आरोपों में आठ निजी स्कूलों पर पांच-पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। शिक्षा विभाग ने जांच के बाद इन मामलों में कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
29 अभिभावकों की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय को कुल 29 अभिभावकों की शिकायतें मिली थीं। शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि कई निजी स्कूल नियमों की अनदेखी करते हुए फीस में मनमानी बढ़ोतरी कर रहे हैं। साथ ही अभिभावकों को सिर्फ तय दुकानों से ही किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।जांच के दौरान आठ स्कूल प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए। इसके बाद संबंधित स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया।
स्कूलों का जवाब नहीं आया संतोषजनक
शिक्षा विभाग के अनुसार, स्कूल प्रबंधन की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए गए। अब अगले सप्ताह सभी संबंधित विद्यालयों को अंतिम सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा। यदि इस दौरान भी स्कूल अपने पक्ष में उचित जवाब नहीं दे सके, तो उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2018 के तहत पांच-पांच लाख रुपये का आर्थिक दंड लगाया जाएगा।
इन स्कूलों पर हो सकती है कार्रवाई
जिन विद्यालयों पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है, उनमें ऐलन हाउस पब्लिक स्कूल (वृंदावन), केके मॉडर्न पब्लिक स्कूल, शीलवती आइडियल स्कूल, आश्रम एकेडमी (कृष्णा नगर), सेंट डोमनिक इंटर कॉलेज, सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल (अयोध्या रोड), ब्राइटवे इंटर कॉलेज (जानकीपुरम) और केजे मॉडर्न पब्लिक स्कूल शामिल हैं।
डीआईओएस ने क्या कहा?
जिला विद्यालय निरीक्षक देवेंद्र पांडेय ने बताया कि सभी संबंधित स्कूलों को अंतिम सुनवाई का अवसर दिया जाएगा। यदि सुनवाई के दौरान भी स्कूल संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, तो नियमों के अनुसार आर्थिक दंड की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने और अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।
