ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद उत्तर प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र के जिलों में बड़े पैमाने पर नाम कटौती ने राजनीतिक हलकों में हंगामा मचा दिया है। सहारनपुर, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, रामपुर और संभल जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में 15-19% तक मतदाताओं के नाम हटने से विपक्ष ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। यह विवाद आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर केंद्रित हो गया है।
SIR प्रक्रिया का पूरा परिदृश्य
उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) 2026 के तहत 6 जनवरी 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की गई। पहले 15.44 करोड़ मतदाताओं की सूची में से 2.89 करोड़ नाम (लगभग 18.7%) हटा दिए गए, जिससे अब 12.55 करोड़ मतदाता बचे। मुख्य कारण मृत्यु, स्थानांतरण, अनुपस्थिति और डुप्लीकेट एंट्री बताए गए हैं।
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राज्य स्तर पर 46.23 लाख मतदाता मृत पाए गए (2.99%)।
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2.57 करोड़ मतदाता (14.06%) स्थायी रूप से बाहर चले गए या अनुपस्थित रहे।
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25.47 लाख नाम डुप्लीकेट थे।
मुस्लिम बहुल जिलों में सबसे ज्यादा कटौती
इन पांच जिलों में मुस्लिम आबादी 30-50% के आसपास है, जो इन्हें चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है। ड्राफ्ट सूची में नाम कटौती के आंकड़े सबसे ऊंचे दर्ज किए गए।
| जिला | नाम कटे (लाख में) | प्रतिशत कटौती | विधानसभा सीटें |
|---|---|---|---|
| सहारनपुर | 4.32 | 16.37% | 7 |
| मुरादाबाद | 3.88 | 15.76% | 6 |
| मुजफ्फरनगर | 3.44 | 16.29% | 6 |
| रामपुर | 3.22 | 18.29% | 5 |
| संभल | 3.19 | 18.29% | 4 |
2022 विधानसभा चुनाव में इन 28 सीटों पर BJP-NDA को 11 और SP गठबंधन को 17 मिली थीं।
राजनीतिक विवाद और विपक्ष का आरोप
विपक्षी दलों ने दावा किया कि मुस्लिम बहुल इलाकों में असमान रूप से नाम काटे गए, जो मतदाता दमन का प्रयास है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग की। BJP ने इसे पारदर्शिता का प्रमाण बताते हुए कहा कि शहरी क्षेत्रों में भी कटौती ज्यादा हुई।
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मुजफ्फरनगर में 85,000 मृत/डुप्लीकेट नाम पाए गए।
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रामपुर स्वार क्षेत्र में दावे-आपत्ति 6 फरवरी तक।
दावे-आपत्ति की प्रक्रिया और अगला कदम
ड्राफ्ट सूची पर 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक दावे-आपत्तियां दर्ज की जा सकती हैं। फॉर्म 6 (नाम जोड़ना), 7 (हटाना), 8 (सुधार) ऑनलाइन या BLO के जरिए जमा कर सकते हैं। सुनवाई और सत्यापन के बाद अंतिम सूची 6 मार्च को आएगी।
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आधिकारिक वेबसाइट: ceouttarpradesh.nic.in या voters.eci.gov.in पर चेक करें।
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PDF डाउनलोड कर नाम सर्च करें।
चुनावी प्रभाव की संभावना
ये जिले पश्चिमी UP के सियासी हॉटस्पॉट हैं, जहां मुस्लिम वोटर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। नाम कटौती से युवा और प्रवासी मतदाताओं पर असर पड़ सकता है। चुनाव आयोग ने पारदर्शिता पर जोर दिया है, लेकिन विवाद बरकरार है।
