Budget 2026 से पहले ही संकेत मिल रहे हैं कि सरकार हाउसिंग फाइनेंस पर बड़ा दांव खेल सकती है, जिससे होम लोन लेना और चुकाना दोनों पहले से सस्ता और आसान हो सकता है। लगातार रिपो रेट में कटौती और टैक्स छूट बढ़ाने की मांग ने घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए उम्मीदें और बढ़ा दी हैं।
Budget 2026 से क्या है बड़ी उम्मीद?
हाउसिंग सेक्टर और फाइनेंस इंडस्ट्री के विशेषज्ञ मानते हैं कि यूनियन बजट 2026 में सरकार होम लोन को सस्ता और टैक्स के लिहाज से ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए अहम ऐलान कर सकती है। उद्देश्य यह है कि मिडिल क्लास और पहली बार घर खरीदने वाले लोगों के लिए EMI का बोझ कम हो और आवासीय मांग को नई गति मिले।
-
फिलहाल सेल्फ-ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी पर होम लोन ब्याज की टैक्स छूट सेक्शन 24(b) के तहत सालाना 2 लाख रुपये तक सीमित है।
-
रियल एस्टेट से जुड़े लोग चाहते हैं कि इस लिमिट को कम से कम 3 से 5 लाख रुपये के बीच किया जाए, ताकि बढ़ी हुई प्रॉपर्टी कीमतों और महंगी EMI की भरपाई हो सके।
टैक्स छूट बढ़ने से कैसे सस्ता होगा होम लोन?
होम लोन सस्ता होने का मतलब सिर्फ ब्याज दर घटने से नहीं, बल्कि कुल टैक्स बोझ कम होने से भी है। अगर बजट 2026 में ब्याज पर टैक्स डिडक्शन की सीमा बढ़ाई जाती है तो टैक्स बचत के जरिए नेट EMI लागत कम महसूस होगी।
-
वर्तमान में 2 लाख की लिमिट लंबे समय से बदली नहीं है, जबकि बड़े शहरों में घरों की कीमतें 2019 के बाद 30–40% तक बढ़ चुकी हैं।
-
कई एक्सपर्ट सेक्शन 80C की 1.5 लाख रुपये वाली सीमा से होम लोन प्रिंसिपल को अलग कर के उसके लिए अलग डिडक्शन लिमिट तय करने की वकालत कर रहे हैं, ताकि PF, इंश्योरेंस और ट्यूशन फीस से प्रतिस्पर्धा खत्म हो सके।
PMAY-CLSS जैसी सब्सिडी की वापसी की मांग
हाउसिंग एफोर्डेबिलिटी बढ़ाने के लिए एक बड़ा सुझाव यह है कि मिडिल इनकम ग्रुप के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (PMAY-CLSS) को फिर से शुरू किया जाए। इस तरह की सब्सिडी होम लोन की ब्याज दर को सीधे घटाकर EMI को कई लाख रुपये तक हल्का कर सकती है।
-
पहले ऐसी सब्सिडी के जरिए खरीदारों को पूरी लोन अवधि में लगभग 3 से 5 लाख रुपये तक की बचत का अंदाजा लगाया गया था।
-
मिडिल क्लास और टियर-2/3 शहरों के खरीदारों के लिए यह राहत घर खरीदने के फैसले को तेजी से आगे बढ़ाने वाला कारक बन सकती है।
RBI की रिपो कट और EMI पर सीधा असर
होम लोन EMI पर Budget 2026 की उम्मीदों के साथ-साथ RBI की मौद्रिक नीति भी बड़ा फैक्टर है। 2025 में रिजर्व बैंक ने लगातार चार बार रिपो रेट घटाकर इसे 6.5% से 5.25% तक ला दिया, जिससे नए और पुराने दोनों तरह के होम लोन पर ब्याज दरों में कमी आई।
-
दिसंबर 2025 की पॉलिसी के बाद 5.25% का मौजूदा रिपो रेट आगे भी कुछ समय तक स्थिर रहने की उम्मीद है, जबकि कुछ विश्लेषक 2026 में 0.25% की अतिरिक्त कट की संभावना भी जता रहे हैं।
-
125 बेसिस प्वाइंट की कटौती से 50 लाख रुपये के 20 साल की अवधि वाले लोन पर EMI या तो घटती है या फिर बैंक EMI को वही रखते हुए लोन अवधि कम कर देते हैं, जिससे कुल ब्याज भुगतान में लगभग 18 लाख रुपये से ज्यादा की बचत का अनुमान लगाया गया है।
डिजिटल प्रोसेस और नो-कॉस्ट बैलेंस ट्रांसफर की उम्मीद
Budget 2026 से एक और बड़ी अपेक्षा है कि सरकार हाउसिंग फाइनेंस प्रक्रिया को ज्यादा डिजिटल, ट्रांसपेरेंट और कॉस्ट-इफिशिएंट बनाने के लिए दिशा-निर्देश या प्रोत्साहन दे। इससे न सिर्फ नए लोन बल्कि रीफाइनेंस और बैलेंस ट्रांसफर करने वाले ग्राहकों को भी राहत मिल सकती है।
-
विशेषज्ञों का सुझाव है कि बजट में नो-कॉस्ट या लो-कॉस्ट बैलेंस ट्रांसफर को बढ़ावा दिया जाए, ताकि उधारकर्ता आसानी से महंगे लोन से सस्ते लोन में शिफ्ट हो सकें।
-
फास्ट डिजिटल अप्रूवल, पेपरलेस डॉक्युमेंटेशन और क्रेडिट स्कोर आधारित डायनेमिक रेटिंग जैसी पहलें हाउसिंग सेक्टर में भरोसा और पारदर्शिता बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।
