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Varanasi gang rape case: चैट्स और उगाही के आरोपों ने बदला जांच का रुख, SIT कर रही गहन पड़ताल

bihar rape case
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Varanasi gang rape case: वाराणसी की 19 वर्षीय युवती के साथ कथित रूप से सात दिनों तक 23 लोगों द्वारा गैंगरेप के मामले ने एक नया और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। सोशल मीडिया चैट्स की जांच में सामने आया है कि पीड़िता ने खुद कुछ युवकों को कैफे में बुलाया था। इसके अलावा, आरोपियों के परिवारों ने Varanasi पुलिस पर पैसे वसूलने का आरोप भी लगाया है। इन घटनाओं के चलते अब इस हाई प्रोफाइल केस की जांच विशेष जांच दल (SIT) को सौंप दी गई है।

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यह मामला उस वक्त सामने आया जब पीड़िता की मां ने 6 अप्रैल को Varanasi पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पीड़िता 29 मार्च को अपने एक दोस्त से मिलने निकली थी और इसके बाद से लापता हो गई। FIR में 12 नामजद और 11 अज्ञात आरोपियों का जिक्र किया गया था। जांच के शुरुआती दौर में छह लोगों की गिरफ्तारी हुई, जो बाद में बढ़कर 12 हो गई।

गिरफ्तार आरोपियों में शामिल राज विश्वकर्मा, समीर आलम और अनमोल गुप्ता पर नशीली दवाओं और सेक्स रैकेट के संचालन का संदेह है। वहीं, पीड़िता ने दावा किया था कि उसे नशा देकर अलग-अलग स्थानों पर उसके साथ गैंगरेप किया गया।

लेकिन अब इस केस में नए चैट सामने आने से जांच की दिशा ही बदल गई है। इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर पीड़िता की कुछ बातचीत के अंशों में यह सामने आया है कि वह खुद आरोपियों से कैफे में मिलने की पहल कर रही थी।

इसी बीच, कुछ आरोपियों के परिजनों ने पुलिस अधिकारियों पर पैसे की उगाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस वजह से डीसीपी चंद्रकांत मीणा को पद से हटा दिया गया और अब SIT मामले की गहराई से जांच कर रही है।

जांच में यह सवाल भी उठा है कि यदि पीड़िता के साथ सात दिन तक गैंगरेप हुआ, तो उसके शरीर पर किसी प्रकार की बाहरी चोट क्यों नहीं है।

यह Varanasi केस अब सिर्फ बलात्कार तक सीमित नहीं रहा। इसमें सोशल मीडिया का दुरुपयोग, सेक्सटॉर्शन, ड्रग्स और पुलिस भ्रष्टाचार जैसे कई गंभीर पहलुओं की भी जांच हो रही है। देशभर में इस केस को लेकर बहस तेज है और अब सभी की नजरें SIT की निष्पक्ष जांच और न्याय पर टिकी हैं।

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