यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में लगी भीषण आग ने कई परिवारों को गहरा सदमा दिया है। हादसे में महोबा के रहने वाले शशांक गुप्ता और उनकी मां सुनीता गुप्ता की भी मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक, आग लगने के बाद सुनीता ने बेटे से खुद बाहर निकलकर जान बचाने को कहा, लेकिन शशांक अपनी मां को अकेला छोड़कर नहीं गए। मां को बचाने की कोशिश में दोनों की जान चली गई।
गुरुग्राम से महोबा लौट रहे थे मां-बेटे
शशांक गुप्ता गुरुग्राम में इंडिगो एयरलाइंस में इंजीनियर के तौर पर काम करते थे। उनकी मां सुनीता पिछले करीब एक महीने से उनके साथ गुरुग्राम में रह रही थीं। परिवार में एक रिश्तेदार को हार्ट अटैक आने की सूचना के बाद दोनों महोबा लौट रहे थे। ट्रेन में सीट नहीं मिलने के कारण उन्होंने बस से सफर करने का फैसला किया था।
हादसे के दौरान शशांक की मां को बाहर निकलने में परेशानी हो रही थी। इसी बीच उन्होंने बेटे से खिड़की या दरवाजा तोड़कर बाहर निकलने को कहा, लेकिन शशांक उन्हें अकेला छोड़कर नहीं गए।
हादसे में सभी 9 मृतकों की पहचान
पुलिस ने हादसे में जान गंवाने वाले सभी नौ यात्रियों की पहचान कर ली है। मृतकों में शशांक गुप्ता और सुनीता गुप्ता के अलावा श्रुति रावत, सरोज गुप्ता, मयंक गुप्ता, देवेंद्र सहाय भारद्वाज, हर शरण गुप्ता, उषा देवी और ओमप्रकाश शामिल हैं। हादसे में कुल 35 यात्री बस में सवार थे, जिनमें 26 लोग बाहर निकलने में सफल रहे।
बस कंपनी के मैनेजर की गिरफ्तारी
हादसे के बाद पुलिस ने बस के दो चालकों और परिचालक को गिरफ्तार किया था। अब राज कल्पना ट्रैवल्स के मैनेजर विकास को भी गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। पुलिस बस की सर्विसिंग, तकनीकी स्थिति और सुरक्षा इंतजामों से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आपातकालीन निकास और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाएं हादसे के समय किस स्थिति में थीं। एक स्वतंत्र तकनीकी जांच भी कराई जा रही है, जिसमें बस की स्थिति और आग के कारणों की पड़ताल होगी।
परिजनों ने कहा- अपनों को खोने का दर्द सबसे बड़ा
हादसे के बाद सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। हालांकि, जिन परिवारों ने अपने लोगों को खोया है, उनके लिए किसी भी मुआवजे से ज्यादा बड़ा अपनों का चले जाना है। हादसे की जांच में यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो पुलिस ने कार्रवाई की बात कही है।
