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Yam Deepdan 2026: धनतेरस पर क्यों जलाया जाता है दक्षिण दिशा में दीपक? जानें क्या है यम दीपदान का मंत्र और सही विधि

Yam Deepdan 2026:धनतेरस का त्योहार दिवाली से पहले मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा और शुभ खरीदारी के साथ यम दीपदान की भी विशेष परंपरा है। इसे यम दीपम भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस की शाम घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीपक जलाने से यमराज प्रसन्न होते हैं। माना जाता है कि इससे परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है। आइए जानते हैं यम दीपदान का मंत्र, पूजा विधि और इसका धार्मिक महत्व।

यम दीपदान का विशेष मंत्र

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यम दीपदान करते समय विशेष मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। दीपक जलाते समय इस मंत्र का पाठ किया जाता है।

मंत्र:

मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह।

त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम॥

इसके अलावा दीपक जलाते समय ‘ॐ यमाय नमः’ मंत्र का जाप भी किया जा सकता है। मान्यता है कि यमराज का स्मरण करके दीपदान करने से परिवार की सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना पूरी होती है।

यम दीपदान की सही विधि

धनतेरस की शाम यम दीपदान करने के लिए इन परंपरागत विधियों का पालन किया जाता है:

  • सबसे पहले आटे या मिट्टी का चौमुखी दीपक लें।
  • दीपक में सरसों का तेल डालकर चार बत्तियां लगाएं।
  • शाम के समय घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाएं।
  • दीपक जलाते समय भगवान यमराज का ध्यान करें।
  • इसके बाद यम दीपदान का मंत्र पढ़ें और परिवार की लंबी उम्र, सुख-शांति और सुरक्षा की प्रार्थना करें।

दक्षिण दिशा में ही क्यों जलाया जाता है दीपक?

हिंदू धार्मिक मान्यताओं में दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना गया है। इसी वजह से यम दीपदान के समय दीपक दक्षिण दिशा की ओर रखकर जलाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस परंपरा का पालन करने से यमराज की कृपा प्राप्त होती है और परिवार के सदस्यों पर उनकी शुभ दृष्टि बनी रहती है।

क्या है यम दीपदान का धार्मिक महत्व?

यम दीपदान को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति और परिवार की सुरक्षा की कामना से जुड़ी परंपरा माना जाता है। धनतेरस की शाम दीपक जलाकर लोग यमराज से परिवार के सदस्यों की लंबी आयु और कल्याण की प्रार्थना करते हैं। यह परंपरा दीपावली के पांच दिवसीय पर्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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