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Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी से शुरू होगा चातुर्मास, जानिए किन कार्यों पर लगेगी रोक

Devshayani Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। इस वर्ष 25 जुलाई से देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास का शुभारंभ होगा, जो 20 नवंबर (देवउठनी एकादशी) तक चलेगा। इस दौरान भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है।

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आचार्य डॉ. मनमोहन मिश्रा के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु सृष्टि के संचालन का दायित्व भगवान शिव को सौंपकर क्षीरसागर में योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं। इसलिए इस अवधि को पूजा, जप, तप, दान और आत्मचिंतन के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है।

इस बार 119 दिनों का रहेगा चातुर्मास

इस वर्ष चातुर्मास 25 जुलाई से शुरू होकर 20 नवंबर तक कुल 119 दिनों का रहेगा। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ संस्कार और अन्य शुभ एवं मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह समय आध्यात्मिक साधना और संयम का होता है।

देवशयनी एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 24 जुलाई, सुबह 9:13 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 25 जुलाई, सुबह 11:35 बजे
  • व्रत (उदयातिथि): 25 जुलाई
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:17 बजे से 6:10 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:55 बजे तक
  • संध्या पूजा मुहूर्त: शाम 7:17 बजे से रात 8:19 बजे तक
  • व्रत पारण: 26 जुलाई, सुबह 5:40 बजे से 8:20 बजे तक

चातुर्मास में करें ये शुभ कार्य

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान भगवान विष्णु की आराधना करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। प्रतिदिन “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र का जाप करें और सुबह सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करें।

जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, कपूर, जूते-चप्पल, छाता और गोदान जैसे दान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इससे जीवन की कई परेशानियां दूर होती हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

चातुर्मास के दौरान तामसिक भोजन जैसे प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का सेवन करने से बचने की सलाह दी जाती है। साथ ही झूठ, क्रोध और बुरे कर्मों से दूर रहकर सात्विक जीवन अपनाने पर जोर दिया जाता है।

यदि संभव हो तो एक समय भोजन का नियम अपनाएं, पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी रखें और साधु-संतों एवं जरूरतमंद लोगों की सेवा करें। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मकता आती है।

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