9/11 Terror Attack : अमेरिका में हुए 9/11 आतंकी हमलों को 25 साल पूरे हो गए हैं। इस त्रासदी की बरसी पर उन निर्दोष लोगों को याद किया जा रहा है, जिन्होंने इस भयावह हमले में अपनी जान गंवाई थी। साथ ही उन परिवारों के प्रति संवेदना और एकजुटता व्यक्त की जा रही है, जिनकी जिंदगी इस घटना के बाद हमेशा के लिए बदल गई।
समय बीतने के बावजूद 9/11 की घटना आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई की गंभीर याद दिलाती है। यह दिन दुनिया को याद दिलाता है कि आतंकवाद का असर केवल एक देश या समाज तक सीमित नहीं रहता।
आतंकवाद के खिलाफ भारत की भूमिका
भारत लंबे समय से आतंकवाद और विशेष रूप से सीमा पार आतंकवाद की चुनौती का सामना करता रहा है। भारत का लगातार यह रुख रहा है कि आतंकवाद किसी एक देश की समस्या नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए खतरा है।
वैश्विक मंचों पर भारत आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग और ठोस कार्रवाई की जरूरत पर जोर देता रहा है। आतंकवाद को किसी भी रूप में स्वीकार न करने और उसके नेटवर्क को खत्म करने के लिए देशों के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण माना जाता है।
आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ संकल्प
आतंकवाद का खतरा समय के साथ अलग-अलग रूपों में सामने आया है। ऐसे में केवल किसी एक तरह के आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।
भारत ने आतंकवाद के सभी स्वरूपों और उसे समर्थन या पनाह देने वाले नेटवर्क के खिलाफ वैश्विक प्रयासों का समर्थन किया है। इस दिशा में देशों के बीच बेहतर सूचना साझा करने और समन्वित कार्रवाई की जरूरत भी महत्वपूर्ण है।
9/11 स्मारक की यात्रा का जिक्र
9/11 स्मारक और संग्रहालय की 2014 की यात्रा को भी इस संदर्भ में याद किया गया। यह स्मारक उस त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति से जुड़ा है और आतंकवाद के खिलाफ सतर्कता की आवश्यकता को सामने रखता है।
आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित दुनिया की जरूरत
9/11 की 25वीं बरसी सिर्फ अतीत को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि भविष्य के लिए आत्मनिरीक्षण का भी समय है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने के लिए दुनिया के देशों को अपने मतभेदों से ऊपर उठकर साझा रणनीति पर काम करने की जरूरत है।
उद्देश्य ऐसी सुरक्षित और भयमुक्त दुनिया बनाना है, जहां आने वाली पीढ़ियों को आतंकवाद के खतरे का सामना न करना पड़े।
