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नवजात बच्चों की कीमत लाखों में ,रंग और जेंडर तय करता कीमत: बनासकांठा में बाल तस्करी रैकेट का खुलासा

Banas Kantha BabyTrafficking: बनासकांठा से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे राज्य में चिंता बढ़ा दी है। यहाँ के एक गरीब खेतिहर दंपत्ति पर आरोप है कि उन्होंने अपने सिर्फ 10 दिन के बेटे को बेच दिया। दंपत्ति ने बताया कि यह उनका पांचवां बच्चा था और गरीबी के कारण वे उसका पालन-पोषण नहीं कर सकते थे। पुलिस ने इसे बाल तस्करी का मामला बताया और तुरंत कार्रवाई करते हुए दंपत्ति सहित दो तस्करों को गिरफ्तार किया। अब तक इस रैकेट में कुल नौ लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।

बच्चों की कीमत- लिंग, म्र और रंग तय करते हैं रेट

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पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बच्चों की कीमत 5 लाख से 15 लाख रुपये के बीच तय की जाती थी। यह मूल्य मुख्य रूप से बच्चे के लिंग, उम्र और रंग पर निर्भर करता था। गोरे रंग के नवजात लड़कों की कीमत सबसे ज्यादा होती थी, जबकि लड़कियों और सांवले रंग के बच्चों को कम कीमत पर बेचा जाता था। इस रैकेट ने गरीब आदिवासी परिवारों को अपने जाल में फंसाया, जो स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा के साधनों से वंचित थे।

रैकेट का पैमाना और पकड़

जांच में पता चला कि पिछले दो सालों में कम से कम 20 आदिवासी बच्चों को गुजरात से हैदराबाद तक बेचा गया। रैकेट मुख्य रूप से साबरकांठा और बनासकांठा के दूरदराज इलाकों में सक्रिय था। क्राइम ब्रांच का मानना है कि यह नेटवर्क आईवीएफ (IVF) क्लीनिकों और कुछ अस्पतालों से भी जुड़ा हो सकता है। पुलिस वर्तमान में अस्पतालों के दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जाँच कर रही है ताकि इस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया जा सके।

एजेंटों की चालाकी और गरीब परिवारों का शोषण

रैकेट के एजेंट जानबूझकर गरीब आदिवासी परिवारों को निशाना बनाते थे। पैसों के लालच में ये परिवार अपने बच्चों को बेचने को मजबूर हो जाते थे। कुछ मामलों में तो जांच से यह भी संकेत मिले हैं कि बच्चों का जन्म केवल उन्हें बेचने के इरादे से कराया गया था।

गिरफ्तारियां और फरार आरोपी

इस समय तक कुल नौ लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। हालांकि, मुख्य एजेंट और कुछ सुविधा प्रदाता अभी भी फरार हैं। क्राइम ब्रांच की टीमें अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं ताकि इस नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।

पहले की घटनाएं

इससे पहले 29 जनवरी को अहमदाबाद एयरपोर्ट के पास 15 दिन के एक शिशु को हैदराबाद ले जाते समय चार आरोपियों को पकड़ा गया था। यह घटनाएं स्पष्ट करती हैं कि बाल तस्करी एक संगठित और दूरगामी समस्या है, जिसे रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है।

 

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