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धनबाद नेशनल लोक अदालत:12 बेंचों ने निपटाए हजारों मामले,समय और पैसे की बचत

National Lok Adalat: धनबाद में आयोजित वर्ष 2026 की दूसरी नेशनल लोक अदालत लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आई। नालसा के निर्देश पर आयोजित इस विशेष अदालत में कुल 3 लाख 73 हजार 234 मामलों का निपटारा किया गया। साथ ही 170 करोड़ 98 लाख रुपये से अधिक की रिकवरी भी हुई। इस आयोजन का उद्देश्य लोगों को जल्दी और आसान न्याय दिलाना था, ताकि उन्हें लंबे समय तक अदालतों के चक्कर न लगाने पड़ें।कार्यक्रम का उद्घाटन शनिवार को रांची से ऑनलाइन माध्यम से न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने किया। धनबाद में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा चेयरमैन निकेश कुमार सिन्हा ने कहा कि नेशनल लोक अदालत संविधान की उस भावना को मजबूत करती है, जिसमें सभी को सुलभ और त्वरित न्याय देने की बात कही गई है। उन्होंने बताया कि हर तीन महीने में इस तरह के आयोजन किए जा रहे हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा मामलों का शांतिपूर्ण समाधान हो सके।

12 बेंचों ने संभाली जिम्मेदारी

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जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव मयंक तुषार टोपनो ने बताया कि विभिन्न प्रकार के विवादों और मुकदमों के निपटारे के लिए 12 विशेष बेंच बनाई गई थीं। इन बेंचों ने आपसी समझौते और सहमति के आधार पर हजारों मामलों को खत्म कराया। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के जरिए लोगों का समय और पैसा दोनों बचते हैं और वर्षों तक चलने वाले विवाद जल्दी समाप्त हो जाते हैं।

शहीद जवान के परिवार को मिला सहारा

नेशनल लोक अदालत के दौरान एक भावुक पल भी देखने को मिला। सीआरपीएफ की 133वीं बटालियन के जवान अरुण कुमार की पत्नी प्रिया कुमारी को 1 करोड़ 14 लाख 96 हजार रुपये का मुआवजा सौंपा गया। अरुण कुमार की वर्ष 2022 में सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उस समय उनकी पत्नी आठ महीने की गर्भवती थीं।इस दुखद घटना के बाद जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने परिवार की मदद के लिए तुरंत कदम उठाया। वीर परिवार योजना के तहत इंश्योरेंस कंपनी और सरकारी प्रक्रिया के जरिए मुआवजा दिलाने की कार्रवाई शुरू की गई।

धनबाद में 170 करोड़ की रिकवरी

अदालत के आदेश के बाद इंश्योरेंस कंपनी ने परिवार को यह राशि दी।प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश निकेश कुमार सिन्हा ने पीड़ित परिवार को चेक सौंपते हुए कहा कि न्याय केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों को सहारा देने का माध्यम भी है। इस मौके पर कई न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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