Diet Coke : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच Diet Coke की कमी को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चा पूरी तरह अफवाह नहीं है। देश के कई बड़े शहरों में इसकी सप्लाई वास्तव में प्रभावित हुई है। हालांकि यह स्थिति LPG जैसी व्यापक ऊर्जा संकट नहीं है, बल्कि मुख्य रूप से पैकेजिंग और सप्लाई-चेन से जुड़ी अस्थायी समस्या मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे सप्लाई सामान्य होगी, बाजार में उपलब्धता भी सुधरने लगेगी।
क्यों हो रही है Diet Coke की कमी?
सबसे बड़ी वजह एल्युमिनियम कैन की कमी बताई जा रही है। भारत में Diet Coke का बड़ा हिस्सा कैन पैकिंग में ही बेचा जाता है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, खासकर Iran से जुड़े हालात के कारण वैश्विक एल्युमिनियम सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर कैन की उपलब्धता पर पड़ा है, जिससे कंपनियों को वितरण में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
दूसरी बड़ी वजह शिपिंग रूट में आई बाधाएं हैं। खाड़ी क्षेत्र से आने वाली पैकेजिंग सामग्री समय पर नहीं पहुंच पा रही है, जिसके कारण डिस्ट्रीब्यूटर्स को सीमित स्टॉक के साथ काम करना पड़ रहा है। कई जगह रिटेलर्स को नियमित सप्लाई नहीं मिल रही, जिससे दुकानों की शेल्फ खाली दिखाई दे रही हैं।
किन शहरों में ज्यादा असर?
रिपोर्ट्स के अनुसार बेंगलुरु, मुंबई, पुणे और अहमदाबाद जैसे महानगरों में कई सुपरमार्केट और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर Diet Coke आउट-ऑफ-स्टॉक दिख रही है। वहीं दिल्ली-एनसीआर सहित कुछ क्षेत्रों में इसकी उपलब्धता अभी भी बनी हुई है।तीसरी वजह गर्मियों में अचानक बढ़ी मांग है। हाल के वर्षों में शुगर-फ्री और लो-कैलोरी ड्रिंक्स की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। फिटनेस और हेल्थ के प्रति जागरूक उपभोक्ता Diet Coke जैसे विकल्पों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं, जिससे उपलब्ध स्टॉक जल्दी खत्म हो रहा है।
क्या यह LPG जैसी बड़ी किल्लत बन सकती है?
फिलहाल ऐसा होने की संभावना कम है। यह समस्या मुख्य रूप से कैन की सप्लाई से जुड़ी है, न कि पेय पदार्थ के उत्पादन से। कंपनियां वैकल्पिक व्यवस्था कर रही हैं, इसलिए इसे अस्थायी सप्लाई-क्रंच माना जा रहा है और आने वाले समय में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।
