Gold demand decline In India: भारत में सोना हमेशा से निवेश और परंपरा का अहम हिस्सा रहा है। लेकिन इस बार कहानी थोड़ी अलग है। इस साल सोने की कीमत करीब 1.76 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से गिरकर लगभग 1.55 लाख रुपये पर आ गई है। यानी करीब 20,000 रुपये की कमी होने के बावजूद बाजार में खरीदारी नहीं बढ़ रही है।
मांग में 70% तक की बड़ी गिरावट
रिपोर्ट्स के मुताबिक सोने की मांग में 70% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। 27 मई को खत्म हुए हफ्ते में मांग सिर्फ 7.5 टन रह गई, जबकि पिछले साल इसी समय यह करीब 25 टन थी। यह गिरावट ज्वैलरी सेक्टर के लिए बड़ा झटका साबित हो रही है।
सरकार की नीतियां और टैक्स का असर
सोने की मांग कम होने के पीछे एक बड़ा कारण आयात शुल्क में बढ़ोतरी भी है। सरकार ने सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी है। इसके साथ ही जीएसटी का बोझ भी बढ़ गया है। इन बदलावों ने सोना और भी महंगा बना दिया है, जिससे आम खरीदार पीछे हट रहे हैं।
महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों का दबाव
देश में पेट्रोल-डीजल, एलपीजी और सीएनजी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। महंगाई का सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ रहा है। बढ़ती लागत के कारण लोगों की खरीदने की क्षमता (Purchasing Power) कमजोर हो गई है, और अब वे महंगे निवेश जैसे सोने से दूरी बना रहे हैं।
खरीदने के बजाय बेच रहे हैं लोग
India Bullion and Jewellers Association के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता के अनुसार, अब लोग सोना खरीदने के बजाय अपनी पुरानी ज्वैलरी बेच रहे हैं। खासकर दक्षिण भारत में, जहां सोने की सबसे ज्यादा मांग रहती थी, वहां भी खरीदारी में भारी कमी आई है। कई लोग जरूरत पड़ने पर हल्के वजन और कम कैरेट वाले गहने ही चुन रहे हैं।
प्रधानमंत्री की अपील का असर या आर्थिक दबाव?
Narendra Modi की ओर से लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील भी चर्चा में है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि असली वजह अपील नहीं, बल्कि महंगाई और टैक्स का बढ़ता बोझ है।
ज्वैलरी सेक्टर के लिए चुनौती का समय
सोने का बाजार फिलहाल दबाव में है। कीमतें कम होने के बावजूद मांग नहीं बढ़ रही, जिससे ज्वैलरी कारोबारियों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। अब देखना होगा कि आने वाले महीनों में स्थिति कब और कैसे सुधरती है।
