Gold Price Fall: दिवाली और धनतेरस से पहले सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है, लेकिन भारतीय सर्राफा बाजार में खरीदारी की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं है। हैरानी की बात यह है कि आम ग्राहकों के साथ बड़े ज्वैलर्स भी फिलहाल सोना खरीदने से बच रहे हैं। उन्हें आशंका है कि कीमतों में अभी और गिरावट आ सकती है। ऐसे में बाजार के बड़े कारोबारी फिलहाल इंतजार करने की रणनीति अपना रहे हैं।
24 फीसदी तक टूट चुके हैं सोने के दाम
जनवरी 2026 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 5,400 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर के पार पहुंच गई थी। इसके बाद कीमतों में गिरावट का सिलसिला शुरू हुआ। अक्टूबर के तीसरे सप्ताह में सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे चला गया। फरवरी के अंत में शुरू हुए अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद बने ऊंचे स्तर से कीमतों में करीब 24 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
बड़े ज्वैलर्स क्यों कर रहे इंतजार?
MMTC-PAMP India के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर समीत गुहा के मुताबिक, बड़ी ज्वैलरी कंपनियां अभी आक्रामक खरीदारी नहीं कर रही हैं। आमतौर पर कीमतें बढ़ने पर ज्वैलर्स भविष्य में महंगी खरीदारी से बचने के लिए स्टॉक जमा करते हैं। वहीं, गिरावट के दौर में वे खरीदारी टाल देते हैं, क्योंकि उन्हें और कम कीमत पर सोना मिलने की उम्मीद रहती है।
फिलहाल छोटे और मझोले ज्वैलर्स जरूरत के हिसाब से खरीदारी कर रहे हैं, जबकि बड़ी कंपनियां बाजार की दिशा समझने का इंतजार कर रही हैं।
15% इंपोर्ट ड्यूटी से भी बढ़ा दबाव
सरकार ने 13 मई 2026 से सोने पर प्रभावी आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया था। इससे विदेश से सोना मंगाना महंगा हो गया है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर सोना आयात करता है। ऐसे में बढ़ी हुई ड्यूटी का असर ज्वैलर्स की खरीदारी और बाजार की मांग पर भी पड़ रहा है।
क्या और सस्ता होगा सोना?
Citi Research के अनुमान के मुताबिक, अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच भारत का सोना आयात करीब 106 टन रह सकता है, जो सामान्य चौथी तिमाही के औसत से काफी कम है। हालांकि, कीमतें आगे कितनी गिरेंगी, यह निश्चित नहीं है। बाजार की दिशा अंतरराष्ट्रीय हालात, मांग और निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी।
