Maharashtra News: महाराष्ट्र कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में हैं। कोई उन्हें “रियल लाइफ सिंघम” कह रहा है तो कोई उनकी ईमानदारी और सख्त फैसलों की तारीफ कर रहा है। करीब 21 साल की प्रशासनिक सेवा में उनके 25 से ज्यादा तबादले हो चुके हैं, लेकिन उनकी कार्यशैली में कभी बदलाव नहीं आया।
फिर क्यों चर्चा में आए तुकाराम मुंढे?
हाल ही में तुकाराम मुंढे को महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) का सचिव और आयुक्त बनाया गया। पद संभालते ही उन्होंने पूरे राज्य में खाद्य पदार्थों में मिलावट और स्वच्छता को लेकर अभियान शुरू कर दिया। उनकी लगातार कार्रवाई से कई होटल, डेयरी और खाद्य कारोबारियों में हलचल मच गई।
बच्चों की सेहत को लेकर लिया बड़ा फैसला
तुकाराम मुंढे ने स्कूलों के आसपास बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए बड़ा कदम उठाया। उन्होंने निर्देश दिया कि स्कूल के 50 मीटर के दायरे में जंक फूड नहीं बेचा जाएगा।
इसके साथ ही चिप्स, चॉकलेट, सॉफ्ट ड्रिंक और अन्य प्रोसेस्ड फूड की बिक्री पर भी रोक लगाने की कार्रवाई शुरू की गई। इस फैसले की कई अभिभावकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सराहना की।
मिलावटखोरों और बड़े होटलों पर भी सख्ती
FDA प्रमुख बनने के बाद मुंढे ने नकली दूध, मिलावटी पनीर और खाद्य तेल के खिलाफ राज्यभर में अभियान चलाया। उन्होंने साफ कहा कि खाने में मिलावट करने वालों पर सिर्फ जुर्माना ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर गिरफ्तारी भी की जाएगी।
स्वच्छता में लापरवाही मिलने पर उन्होंने कुछ प्रतिष्ठित होटल और क्लबों पर भी सख्त कार्रवाई की। इसी दौरान एक पांच सितारा होटल का लाइसेंस रद्द किए जाने का मामला अदालत तक पहुंच गया।
हाई कोर्ट की टिप्पणी के बाद कैंटीन में भी जांच
होटल मामले की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि कार्रवाई करते समय व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। साथ ही अदालत ने FDA को सरकारी और अर्ध-सरकारी कैंटीनों का भी निरीक्षण करने का निर्देश दिया।
इसके बाद FDA की टीम ने बॉम्बे हाई कोर्ट की कैंटीन सहित कई सरकारी कैंटीनों का निरीक्षण किया, जहां लाइसेंस और स्वच्छता से जुड़ी कुछ कमियां सामने आईं। निरीक्षण की रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई।
क्यों कहलाते हैं ‘सिंघम IAS’?
तुकाराम मुंढे को लोग उनकी ईमानदार छवि, सख्त प्रशासनिक फैसलों और नियमों के समान पालन के कारण “सिंघम IAS” कहते हैं। बार-बार तबादलों के बावजूद उन्होंने हर जिम्मेदारी को पूरी गंभीरता से निभाया। यही वजह है कि आज वे सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश में एक निडर और ईमानदार अधिकारी के रूप में पहचाने जाते हैं।
