Missing Sister Found After 15 Years: बरसात के बाद गांव की गलियों में बच्चे रोज की तरह खेल रहे थे। आठ साल की रजनी भी दोस्तों के साथ पकड़म-पकड़ाई खेल रही थी। तभी गांव में एक सपेरा आया। बीन की आवाज सुनकर बच्चे उसके पीछे चल पड़े और रजनी भी उन्हीं के साथ हो ली।
शाम हुई तो बाकी बच्चे घर लौट आए, लेकिन रजनी वापस नहीं आई। परिवार ने पूरे गांव और आसपास के इलाकों में उसे तलाशा। पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत भी दर्ज कराई गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
बेटी के इंतजार में टूट गए माता-पिता
दिन महीनों में और महीने सालों में बदलते गए। रजनी के माता-पिता हर दिन बेटी के लौटने की उम्मीद करते रहे। इसी बीच बीमारी और बेटी के गम ने दोनों को तोड़ दिया। कुछ समय बाद पिता की मौत हो गई और मां भी ज्यादा दिन नहीं जी सकीं।
माता-पिता के जाने के बाद भी रजनी का भाई अर्जुन उसकी तलाश करता रहा। शादी और परिवार की जिम्मेदारियों के बावजूद उसने बहन को कभी भुलाया नहीं।
कमाई के बहाने शहर पहुंचा भाई
करीब 15 साल बाद अर्जुन शहर पहुंचा। बाहर से उसका मकसद मजदूरी करके पैसे कमाना था, लेकिन असली वजह बहन की तलाश थी। उसने रिक्शा चलाया, मजदूरी की और अलग-अलग जगहों पर काम किया। साथ ही वह रजनी से जुड़े हर संभावित सुराग को तलाशता रहा।
एक दिन उसे पता चला कि शहर के कांच बाजार इलाके के एक कोठे पर शायद उसकी बहन जैसी एक महिला मौजूद है। यह सुनकर अर्जुन के पैरों तले जमीन खिसक गई।
एक शब्द ने खोल दिया 15 साल का दर्द
अर्जुन ने सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद ली और उस जगह तक पहुंचा। जब महिला से उसका नाम पूछा गया तो उसने सिर हिलाकर अपनी पहचान की पुष्टि की। अर्जुन की नजर जैसे ही उस पर पड़ी, उसे यकीन हो गया कि वह उसकी छोटी बहन रजनी ही है।
दोनों ने एक-दूसरे को देखा और रजनी के मुंह से सिर्फ एक शब्द निकला—“भइया…”
इसके बाद दोनों भाई-बहन एक-दूसरे से लिपटकर रो पड़े। 15 साल का इंतजार उस पल आंसुओं में बह गया।
बहन घर लौटी, लेकिन खुशी अधूरी रही
रजनी को आखिरकार उस जिंदगी से बाहर निकालकर घर लाया गया। परिवार में खुशी का माहौल था। भतीजों ने पहली बार अपनी बुआ को देखा और घर फिर से रिश्तों की गर्माहट से भर गया।
लेकिन अर्जुन के मन में एक दर्द हमेशा रहेगा—काश, उसके माता-पिता आज जिंदा होते। जिन मां-बाप ने बेटी के लौटने का सालों इंतजार किया, वे उसकी वापसी की खुशी नहीं देख सके।
सबसे भावुक बात यही थी कि रजनी किसी दूर देश में नहीं, बल्कि उसी शहर में वर्षों से जिंदगी गुजार रही थी। भाई ने उम्मीद नहीं छोड़ी और आखिरकार 15 साल बाद अपनी बहन को खोज निकाला।
