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RSS से परिवार का पुराना नाता, खुद को हिंदू बताती हैं स्मृति ईरानी, जानिए क्या है पूरी कहानी

बीजेपी की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी एक बार फिर पार्टी संगठन में बड़ी भूमिका को लेकर चर्चा में हैं। 17 अगस्त 2026 को बीजेपी ने राष्ट्रीय टीम का ऐलान किया, जिसमें स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी दी गई। इससे उनकी संगठनात्मक राजनीति में वापसी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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राजनीति में आने से पहले स्मृति ईरानी टीवी की दुनिया का जाना-पहचाना चेहरा थीं। ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में तुलसी के किरदार ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया था। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और बीजेपी में अपनी अलग पहचान बनाई।

पिता पंजाबी, मां बंगाली परिवार से

स्मृति ईरानी का पारिवारिक बैकग्राउंड काफी विविध रहा है। उनके पिता अजय कुमार मल्होत्रा की पारिवारिक जड़ें पंजाबी और मराठी समुदाय से जुड़ी बताई जाती हैं। वहीं उनकी मां शिबानी बागची बंगाली परिवार से थीं। उनके नाना बंगाली और नानी असमिया पृष्ठभूमि से थीं।

इसी वजह से स्मृति ईरानी की पारिवारिक पहचान कई अलग-अलग क्षेत्रीय और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ी नजर आती है। हालांकि, किसी व्यक्ति की जाति या धर्म केवल पारिवारिक पृष्ठभूमि या सरनेम से तय करना सही नहीं माना जा सकता।

पति पारसी हैं, फिर स्मृति कौन सा धर्म मानती हैं?

स्मृति ईरानी ने साल 2001 में जुबिन ईरानी से शादी की थी। जुबिन पारसी धर्म से ताल्लुक रखते हैं। शादी के बाद स्मृति के नाम के साथ ‘ईरानी’ सरनेम जुड़ा, जिसके कारण सोशल मीडिया पर अक्सर उनके धर्म को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

लेकिन स्मृति ईरानी ने सार्वजनिक रूप से खुद को हिंदू बताया है। एक मीडिया कार्यक्रम में जब उनसे पूछा गया कि वह हिंदू हैं या पारसी, तो उन्होंने स्पष्ट तौर पर खुद को हिंदू बताया था। उन्होंने यह भी कहा था कि उनके पति पारसी हैं, लेकिन उनकी अपनी धार्मिक पहचान हिंदू है।इसलिए सिर्फ ‘ईरानी’ सरनेम देखकर उनके धर्म का अनुमान लगाना उचित नहीं है।

RSS से क्या है स्मृति ईरानी का नाता?

स्मृति ईरानी के परिवार का RSS और जनसंघ से जुड़ाव भी चर्चा में रहा है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध प्रोफाइल और मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि उनके दादा RSS के स्वयंसेवक थे, जबकि उनकी मां शिबानी बागची के जनसंघ से जुड़े होने का उल्लेख मिलता है।

यही पारिवारिक पृष्ठभूमि स्मृति ईरानी की राजनीतिक यात्रा के संदर्भ में अक्सर चर्चा में आती है। हालांकि, उनके राजनीतिक करियर की पहचान मुख्य रूप से बीजेपी में निभाई गई उनकी अपनी सक्रिय भूमिका से बनी।

टीवी की तुलसी से बीजेपी की बड़ी नेता तक

स्मृति ईरानी ने 2004 में चुनावी राजनीति में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने बीजेपी संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। 2014 में उन्होंने अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ा। हालांकि उस चुनाव में उन्हें हार मिली, लेकिन 2019 में उन्होंने अमेठी में राहुल गांधी को हराकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया।

2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा से हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद पार्टी में उनकी सक्रियता जारी रही। अब राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी मिलने के बाद संगठन में उनकी भूमिका फिर महत्वपूर्ण हो गई है।

स्मृति ईरानी की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने मनोरंजन की दुनिया से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी जगह बनाई। उनकी पारिवारिक विविधता, धार्मिक पहचान और राजनीतिक सफर तीनों ही उन्हें सार्वजनिक जीवन की चर्चित शख्सियत बनाते हैं।

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