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आसमान में उड़ने वालों पर मंडरा रहा कैंसर का खतरा? पायलट-क्रू को लेकर चौंकाने वाली स्टडी

Pilot and Air Hostess Cancer Risk: पायलट और एयर होस्टेस की नौकरी बाहर से जितनी ग्लैमरस नजर आती है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है। लगातार फ्लाइट में रहना, बदलता शेड्यूल और लंबे समय तक आसमान में रहना उनके शरीर पर असर डाल सकता है। अब एक रिसर्च ने उनकी सेहत से जुड़े एक और पहलू पर ध्यान खींचा है।

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रिसर्च के मुताबिक, एयरक्रू मेंबर्स को कुछ प्रकार के कैंसर का जोखिम दूसरे व्यवसायों में काम करने वाले लोगों की तुलना में अधिक हो सकता है। इसकी एक प्रमुख वजह ऊंचाई पर मिलने वाला कॉस्मिक रेडिएशन बताया गया है।

ऊंचाई बढ़ते ही क्यों बढ़ता है रेडिएशन?

धरती का वातावरण और उसका सुरक्षा कवच अंतरिक्ष से आने वाली कई तरह की विकिरण ऊर्जा से हमारी रक्षा करता है। लेकिन जब विमान बहुत अधिक ऊंचाई पर उड़ता है, तो यह प्राकृतिक सुरक्षा अपेक्षाकृत कम हो जाती है।

इसी वजह से लंबे समय तक उड़ान भरने वाले पायलट और केबिन क्रू कॉस्मिक रेडिएशन के संपर्क में आते रहते हैं। खासकर लंबी दूरी और ध्रुवीय क्षेत्रों के आसपास से गुजरने वाली उड़ानों में यह एक्सपोजर अधिक हो सकता है।

रेडिएशन शरीर को कैसे नुकसान पहुंचाता है?

आयनाइजिंग रेडिएशन शरीर की कोशिकाओं और DNA को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है। ज्यादा या लंबे समय तक एक्सपोजर होने पर यह स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ा सकता है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर पायलट या एयर होस्टेस को कैंसर होगा। कैंसर कई कारणों से होने वाली जटिल बीमारी है और किसी व्यक्ति के जोखिम पर उम्र, आनुवंशिकता, जीवनशैली और अन्य पर्यावरणीय कारकों का भी प्रभाव पड़ता है।

किन कैंसर पर सामने आया ज्यादा ध्यान?

रिसर्च में पायलटों और फ्लाइट अटेंडेंट्स के स्वास्थ्य रिकॉर्ड की तुलना दूसरे कामकाजी समूहों से की गई। इसमें ब्रेस्ट कैंसर, ल्यूकेमिया, मल्टीपल मायलोमा और सेंट्रल नर्वस सिस्टम से जुड़े कैंसर समेत कई बीमारियों पर गौर किया गया।

रिसर्च में एयरक्रू के बीच कुछ कैंसर जोखिम अधिक दिखाई दिए, लेकिन ऐसे अध्ययनों के नतीजों को सावधानी से समझना जरूरी है। केवल रेडिएशन को ही इसका एकमात्र कारण मानना सही नहीं होगा।

यात्रियों को घबराने की जरूरत है?

अगर आप कभी-कभार विमान से यात्रा करते हैं तो एयरक्रू की तुलना में आपका रेडिएशन एक्सपोजर काफी कम होता है। नियमित यात्रियों के लिए इस वजह से अनावश्यक डरने की जरूरत नहीं है।

असल चिंता उन लोगों की है जो अपने काम के कारण हर साल सैकड़ों घंटे ऊंचाई पर बिताते हैं। इसलिए विशेषज्ञों की ओर से एयरलाइन कर्मचारियों की नियमित स्वास्थ्य जांच, उड़ान घंटों की निगरानी और बेहतर सुरक्षा दिशानिर्देशों पर जोर दिया जाता है।

कुल मिलाकर, यह रिसर्च एविएशन इंडस्ट्री के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। पायलट और केबिन क्रू की सुरक्षा सिर्फ उड़ान के दौरान ही नहीं, बल्कि लंबे समय में उनकी सेहत को ध्यान में रखकर भी सुनिश्चित करना जरूरी है।

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