Delhi News: दिल्ली का मशहूर कनॉट प्लेस (सीपी) एक बार फिर चर्चा में है। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान यहां सुरक्षा और साफ-सफाई के कड़े इंतजाम किए गए तो पूरा इलाका बदला-बदला नजर आया। बरामदे और गलियारे अतिक्रमण से मुक्त दिखे और लोगों को खुले रास्तों में आराम से घूमते देखा गया। इस तस्वीर को देखकर स्थानीय व्यापारियों ने सवाल उठाया कि जब कुछ दिनों के लिए व्यवस्था इतनी बेहतर हो सकती है, तो आम दिनों में ऐसा क्यों नहीं?
सम्मेलन के दौरान दिखा कनॉट प्लेस का पुराना अंदाज
ब्रिक्स और इससे पहले जी-20 जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के दौरान कनॉट प्लेस में अवैध रेहड़ी-पटरी और अन्य अतिक्रमण हटाए गए। इसके बाद सीपी के ऐतिहासिक बरामदे और गलियारे बेहद साफ और व्यवस्थित नजर आए।
कई लोगों को कनॉट प्लेस का वही पुराना भव्य स्वरूप देखने को मिला, जिसकी पहचान कभी दिल्ली की खास तस्वीर के तौर पर होती थी। बैठने की जगह और पैदल चलने के लिए पर्याप्त स्थान होने से बाजार का माहौल भी काफी बेहतर दिखाई दिया।
व्यापारियों ने प्रशासन से पूछा बड़ा सवाल
स्थानीय व्यापारियों और दिल्लीवासियों का कहना है कि विदेशी मेहमानों के आने पर अगर तीन-चार दिनों में पूरा इलाका अतिक्रमण मुक्त कराया जा सकता है, तो आम जनता को यह सुविधा पूरे साल क्यों नहीं मिल सकती?
व्यापारियों के मुताबिक अवैध वेंडिंग से नियमित दुकानदारों का कारोबार प्रभावित होता है। इसके अलावा भीड़ बढ़ने से ग्राहकों को चलने-फिरने में परेशानी होती है और कई जगह सुरक्षा संबंधी जोखिम भी पैदा हो सकते हैं।
कोर्ट के आदेशों के बावजूद बनी हुई है समस्या
कनॉट प्लेस में अवैध रेहड़ी-पटरी का मुद्दा कई वर्षों से चला आ रहा है। व्यापारी संगठन इस मामले को लेकर आंदोलन के साथ कानूनी लड़ाई भी लड़ते रहे हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों में कनॉट प्लेस को नो-हॉकिंग और नो-वेंडिंग क्षेत्र के रूप में रखने की बात सामने आती रही है। इसका उद्देश्य इस ऐतिहासिक क्षेत्र के स्वरूप और व्यवस्था को बनाए रखना है। हालांकि, व्यापारियों का आरोप है कि नियमित निगरानी और कार्रवाई की कमी के कारण अतिक्रमण फिर लौट आता है।
स्थायी समाधान की मांग
व्यापारी अब चाहते हैं कि बड़े आयोजनों के दौरान दिखने वाली व्यवस्था केवल कुछ दिनों तक सीमित न रहे। उनका कहना है कि कनॉट प्लेस को स्थायी रूप से साफ, सुरक्षित और अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए नियमित कार्रवाई जरूरी है।
दिल्ली के इस ऐतिहासिक बाजार की खूबसूरती और पहचान बचाने के लिए प्रशासन, पुलिस और संबंधित एजेंसियों को मिलकर लंबे समय की व्यवस्था तैयार करनी होगी। सवाल यही है कि अगर अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए कनॉट प्लेस अपना पुराना रूप वापस पा सकता है, तो दिल्लीवासियों के लिए 365 दिन क्यों नहीं?
