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Delhi News: सौरभ दास की सोशल मीडिया पोस्ट पर कोर्ट सख्त, कहा- बिना पुष्टि के हमला ठीक नहीं

Delhi News: सीजेपी नेता सौरभ दास से जुड़े मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें विरोध और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर महत्वपूर्ण नसीहत दी। जस्टिस तुषार राव गेडेला ने सुनवाई के दौरान कहा कि विरोध करने के कई तरीके हो सकते हैं, लेकिन किसी भी सामग्री को शेयर करने से पहले उसकी सच्चाई की जांच करना बेहद जरूरी है। अदालत ने यह भी कहा कि युवा नेताओं को अपना समय बार-बार अदालतों में बिताने के बजाय दूसरे जरूरी कामों पर लगाना चाहिए।

फर्जी न्यूज कार्ड शेयर करने से शुरू हुआ विवाद

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मामला एक कथित फर्जी न्यूज कार्ड से जुड़ा है। सौरभ दास ने पिछले दिनों भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया के नाम से एक ऐसा पोस्ट शेयर किया था, जिसमें जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान एक दलित व्यक्ति से कथित मारपीट करने वाले स्वतंत्र भारद्वाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी दिखाई गई थी।

गौरव भाटिया ने इस पोस्ट को तुरंत फर्जी बताया और कहा कि उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। बाद में सौरभ दास ने भी माना कि यह पोस्ट एआई की मदद से बनाया गया था। इसके बाद उन्होंने पोस्ट डिलीट कर दिया।

माफी की मांग और मानहानि का मुकदमा

पोस्ट हटाने के साथ गौरव भाटिया ने सौरभ दास से माफी मांगने की मांग भी की थी। हालांकि, दास ने माफी मांगने से इनकार किया। इसके बाद भाजपा नेता ने दिल्ली हाई कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर करते हुए 2 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की।

सुनवाई के दौरान अदालत ने सौरभ दास और सीजेपी के सह संयोजक आशुतोष रांका को विवादित पोस्ट खुद हटाने का मौका दिया। दास के वकील ने बताया कि संबंधित पोस्ट पहले ही डिलीट की जा चुकी है। इस पर अदालत ने कुछ अन्य पोस्ट की ओर भी ध्यान दिलाया और उन्हें हटाने की सलाह दी।

कोर्ट ने कहा- पहले सही और गलत की जांच करें

जस्टिस गेडेला ने सुनवाई के दौरान सीजेपी नेताओं को समझाया कि विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन किसी व्यक्ति के खिलाफ सामग्री साझा करते समय उसकी पुष्टि जरूरी है। अदालत ने कहा कि युवाओं में जोश और व्यग्रता होना स्वाभाविक है, लेकिन बिना तथ्य जांचे किसी पर हमला करना उचित नहीं है।

कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि वह तत्काल कोई सख्त आदेश देने के बजाय नेताओं को खुद विवादित सामग्री हटाने का अवसर देना चाहता है।

क्यों अदालतों में बिताना चाहते हैं समय?’

सुनवाई के दौरान जस्टिस गेडेला ने सौरभ दास को यह भी समझाया कि उनकी उम्र में अभी लंबी राजनीतिक और सामाजिक यात्रा बाकी है। ऐसे में लगातार विवादों और मुकदमों में समय गंवाने से बचना चाहिए।

अदालत की इस टिप्पणी का सार यही रहा कि सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हुए भी जिम्मेदारी जरूरी है। विरोध की आवाज मजबूत हो सकती है, लेकिन तथ्य की जांच और संयम उसे ज्यादा प्रभावी बनाते हैं।

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