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Intermittent Fasting: क्या हर किसी के लिए सुरक्षित है इंटरमिटेंट फास्टिंग? जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट

Intermittent Fasting: वजन घटाने और फिट रहने के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting) तेजी से लोकप्रिय हो रही है। हालांकि भारत में उपवास की परंपरा सदियों पुरानी है, लेकिन हाल के वर्षों में फिटनेस एक्सपर्ट्स, सेलिब्रिटीज और हेल्थ इन्फ्लुएंसर्स ने इसे वेट लॉस का प्रभावी तरीका बताकर काफी लोकप्रिय बना दिया है। इंटरमिटेंट फास्टिंग में खाने का समय सीमित कर दिया जाता है, जिससे कैलोरी का सेवन कम होता है और वजन घटाने में मदद मिल सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसे बिना सही जानकारी और सलाह के अपनाना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकता है।

क्या है Intermittent Fasting?

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इंटरमिटेंट फास्टिंग में खाने और उपवास का समय तय किया जाता है। सबसे लोकप्रिय तरीका 16:8 है, जिसमें 16 घंटे उपवास और 8 घंटे के भीतर भोजन किया जाता है। वहीं 12:12 पैटर्न में 12 घंटे फास्टिंग और 12 घंटे भोजन की अनुमति होती है। कुछ लोग दिन में केवल दो बार भोजन करना भी पसंद करते हैं। इसका उद्देश्य शरीर को लगातार भोजन पचाने से आराम देना और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाना होता है।

क्या हर व्यक्ति कर सकता है Intermittent Fasting?

डाइटिशियन स्वाति सिंह के अनुसार इंटरमिटेंट फास्टिंग हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं है। इससे मेटाबॉलिक हेल्थ और पाचन तंत्र को लाभ मिल सकता है, लेकिन इसे बिना स्वास्थ्य स्थिति जाने अपनाना सही नहीं है। किसी भी नई डाइट को शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

किन लोगों को नहीं करनी चाहिए फास्टिंग?

विशेषज्ञों के अनुसार टाइप-1 डायबिटीज, अनियंत्रित टाइप-2 डायबिटीज, लगातार हाई ब्लड शुगर या हाई HbA1c वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना इंटरमिटेंट फास्टिंग नहीं करनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, बच्चों और किशोरों को भी इससे बचना चाहिए क्योंकि उन्हें नियमित पोषण की आवश्यकता होती है। इसके अलावा किडनी, हृदय या अन्य गंभीर अंगों की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए भी यह तरीका सुरक्षित नहीं माना जाता।

Intermittent Fasting के संभावित नुकसान

लंबे समय तक भोजन न करने से सिरदर्द, कमजोरी, थकान और चक्कर आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ लोगों को पेट फूलना, दस्त, कब्ज और पाचन संबंधी दिक्कतें भी हो सकती हैं। यदि सीमित समय में जरूरत से ज्यादा भोजन कर लिया जाए तो पोषण असंतुलित हो सकता है। पर्याप्त पानी और संतुलित आहार न लेने पर शरीर में कमजोरी और डिहाइड्रेशन का खतरा भी बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों की सलाह

इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करने से पहले अपनी उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और जीवनशैली का आकलन करना जरूरी है। यदि किसी प्रकार की बीमारी है या नियमित दवा ले रहे हैं, तो डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेकर ही इसे अपनाएं। सही तरीके और संतुलित आहार के साथ ही इंटरमिटेंट फास्टिंग लाभदायक हो सकती है।

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