Cancer Awareness: 26 वर्षीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की चार साल तक स्किन कैंसर (मेलानोमा) से जूझने के बाद मौत हो गई। उनकी कहानी अब दुनिया भर के लोगों के लिए एक बड़ी सीख बन गई है। उन्होंने अपनी बीमारी के दौरान लगातार लोगों से अपील की थी कि शरीर में दिखाई देने वाले छोटे-छोटे बदलावों को कभी नजरअंदाज न करें। खासतौर पर तिल (Mole) में होने वाले किसी भी असामान्य परिवर्तन को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
शुरुआत में सामान्य लगा था तिल
रिपोर्ट्स के अनुसार, शुरुआत में उनके शरीर पर मौजूद एक तिल सामान्य दिखाई देता था। समय के साथ उसका रंग बदलने लगा, आकार बढ़ गया और उसकी बनावट भी पहले जैसी नहीं रही। शुरुआत में इसे सामान्य त्वचा संबंधी समस्या समझा गया, लेकिन जब डॉक्टर से जांच कराई गई तो पता चला कि यह मेलानोमा नाम का स्किन कैंसर है। यह त्वचा कैंसर का सबसे गंभीर प्रकार माना जाता है, जो समय रहते इलाज न मिलने पर शरीर के अन्य अंगों तक फैल सकता है।
चार साल तक जारी रही इलाज की लड़ाई
बीमारी का पता चलने के बाद इन्फ्लुएंसर ने सर्जरी, इम्यूनोथेरेपी और अन्य आधुनिक उपचारों के जरिए कैंसर से लंबी लड़ाई लड़ी। इस दौरान वह सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करती रहीं और लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने के लिए प्रेरित करती रहीं। उन्होंने कई बार कहा था कि अगर उन्होंने शुरुआत में ही बदलावों पर ध्यान दिया होता, तो शायद स्थिति अलग हो सकती थी।
किन संकेतों को नजरअंदाज न करें?
त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी तिल का रंग बदलने लगे, आकार तेजी से बढ़े, किनारे असमान दिखाई दें, उसमें खुजली, दर्द, जलन या खून आने जैसी समस्या हो, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। शुरुआती चरण में मेलानोमा की पहचान होने पर इलाज की सफलता की संभावना काफी अधिक होती है।
जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का कहना है कि तेज धूप में लंबे समय तक रहने से बचना, सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना और समय-समय पर त्वचा की स्वयं जांच करना अच्छी आदत है। किसी भी असामान्य बदलाव को अनदेखा करने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना गंभीर बीमारी से बचा सकता है। इन्फ्लुएंसर की कहानी यही संदेश देती है कि शरीर के संकेतों को समय रहते समझना और जांच कराना कई बार जीवन बचा सकता है।
