Vitamin Deficiency Symptoms: कई बार ऐसा होता है कि नींद पूरी होती है, काम का दबाव भी ज्यादा नहीं होता, फिर भी मन भारी और मूड खराब रहता है। लोग इसे अक्सर स्ट्रेस या लाइफस्टाइल की गड़बड़ी मान लेते हैं, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार इसकी एक वजह शरीर में जरूरी विटामिन और मिनरल्स की कमी भी हो सकती है।हमारा दिमाग सिर्फ भावनाओं से नहीं चलता, बल्कि एक जटिल केमिकल सिस्टम पर काम करता है। अगर शरीर को सही पोषण नहीं मिलता, तो इसका असर सीधे मूड, सोचने की क्षमता और एनर्जी लेवल पर दिखाई देता है।
एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
मेदांता के विशेषज्ञ डॉ. सौरभ मेहरोत्रा के अनुसार, तनाव और मूड स्विंग्स को अक्सर नींद की कमी या भागदौड़ भरी जिंदगी से जोड़ा जाता है, लेकिन कई मामलों में पोषण की कमी भी अहम कारण होती है। दिमाग को सेरोटोनिन, डोपामिन और गाबा जैसे न्यूरोट्रांसमीटर बनाने के लिए जरूरी पोषक तत्व चाहिए होते हैं, जो मूड और फोकस को नियंत्रित करते हैं।
विटामिन D की कमी और लो मूड
विटामिन D को आमतौर पर हड्डियों के लिए जरूरी माना जाता है, लेकिन इसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। धूप की कमी, लंबे समय तक घर या ऑफिस में रहना और प्रदूषण इसकी कमी के बड़े कारण हैं। इसकी कमी से थकान, सुस्ती और उदासी महसूस हो सकती है। कई मामलों में इसके लक्षण डिप्रेशन जैसे भी दिखते हैं।
विटामिन B12: धीरे-धीरे असर दिखाने वाली कमी
विटामिन B12 की कमी समय के साथ असर करती है। लगातार थकान, भूलने की आदत और दिमाग में “ब्रेन फॉग” इसके संकेत हो सकते हैं। यह खासकर शाकाहारी लोगों और बुजुर्गों में ज्यादा देखने को मिलता है। यह नसों और मानसिक संतुलन के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है।
B6, फोलेट, मैग्नीशियम और आयरन का रोल
विटामिन B6 और फोलेट दिमाग में ऐसे केमिकल बनाने में मदद करते हैं जो हमें शांत रखते हैं। इनकी कमी से चिड़चिड़ापन और इमोशनल असंतुलन बढ़ सकता है।मैग्नीशियम को शरीर का नैचुरल रिलैक्सिंग मिनरल माना जाता है। इसकी कमी से चिंता, नींद की समस्या और सिरदर्द बढ़ सकता है। वहीं आयरन की कमी दिमाग तक ऑक्सीजन की सप्लाई कम कर देती है, जिससे थकान और मूड डाउन होने लगता है।
हर बार वजह सिर्फ पोषण नहीं
हालांकि हर मूड स्विंग का कारण विटामिन की कमी नहीं होता। तनाव, रिश्ते और लाइफस्टाइल भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। इसलिए लगातार लक्षण दिखें तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहता है।
(Disclaimer- यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. The Mid Post इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
